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छह दिन लापता रहे फिर बरेली में प्रकट हुए बसपा के जोन इंचार्ज

Sun, 12 Nov 2017 12:53 AM IST
बदायूं।
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जयपाल शाक्य। - फोटो : अमर उजाला
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बदायूं। पार्टी की बैठक से गायब हुए बसपा के बरेली जोन इंचार्ज जयपाल शाक्य छह दिन बाद शनिवार शाम को खुद ही अलीगंज थाने में प्रकट हो गए। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनको बेहोश करके अगवा किया गया। होश में आने पर खुद को अलीगंज के जंगल में पाया। अलीगंज थानाध्यक्ष धर्मेंद्र गुप्ता ने बदायूं सिविल लाइन थाने को उनके पाये जाने की सूचना दी। इस मामले में जोन इंचार्ज के गायब होने के बाद उनके परिवार ने टिकट वितरण में रुपयों के लेनदेन का मामला बताकर उझानी से पार्टी प्रत्याशी समेत तीन मुख्य जोन इंचार्ज पर उन्हें गायब करने का आरोप लगाए थे।
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शनिवार को सिविल लाइंस थाने आए जरीफनगर थाना क्षेत्र के गांव केरई सेरई निवासी लीलाधर ने बताया कि उनके पुत्र जयपाल शाक्य उर्फ तोफान सिंह बसपा के बरेली जोन इंचार्ज हैं। उन्होंने दो नवंबर की बैठक में उझानी से पार्टी प्रत्याशी पुरुषोत्तम दास वार्ष्णेय का रुपये लेकर टिकट देने का विरोध किया था। आरोप है कि उसी दिन मुख्य जोन इंचार्ज बरेली मंडल संजीव सागर और आजाद सिंह ने जयपाल शाक्य के मोबाइल पर फोन करके उसे धमकाया और हत्या कर शव गायब करने की धमकी दी। जयपाल ने उसी दिन इसकी एसएसपी से शिकायत की।
चार नवंबर की शाम छह बजे पुरुषोत्तम दास वार्ष्णेय का बेटा कार से ड्राइवर को लेकर उनके घर पहुंचा। वहां बताया कि मुख्य जोन इंचार्ज संजीव सागर, आजाद सिंह और जयपाल सिंह उनसे लिए हुए रुपये आपके सामने देने को कह रहे हैं। कहा कि बदायूं के एक होटल में वे लोग मौजूद हैं, आप साथ चलें। लीलाधर के मुताबिक भरोसे में जयपाल शाक्य इन लोगों के साथ चले आए। अब उनका पता नहीं लगा है। उन्हें अनहोनी की आशंका सता रही है। उन्हें शक है कि इन नेताओं ने उन्हें कहीं गायब कर दिया है। इस मामले में सिविल लाइंस थाने ने गुमशुदगी दर्ज कर सर्विलांस के सहारे तलाश शुरू की है। बता दें कि दो नवंबर को ही नेताओं पर टिकट के नाम पर पैसे लेने का आरोप लगाते हुए जयपाल शाक्य ने पद से इस्तीफा देते हुए बसपा सुप्रीमो को भेजने का दावा किया था।
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शनिवार शाम को जयपाल शाक्य खुद ही थाने पहुंचे। उनके साथ अलीगंज के सूदनपुर ग्राम प्रधान के पति थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि टायलेट करने गए थे, जब दो बदमाशों ने पीछे से रुमाल डालकर उनको बेहोश का दिया था। उन्हें होश आया तो वह अलीगंज के जंगल में थे। 
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एक दिन में 83 कॉल हुई थीं बसपा नेता के मोबाइल पर
जोन कोआर्डिनेटर के  मिलने बाद तरह तरह की अटकलें
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बसपा नेता जयपाल शाक्य के छह दिन गायब रहने का मामला पेंचीदा है। घरवालों और आरोपियों के अपने दावे हैं पर अब तक की जांच से लगता है कि असली राज दोनों ही छुपा रहे हैं।
सर्विलांस से जांच में पता लगा है कि चार नवंबर को जयपाल शाक्य के मोबाइल पर कुल 83 कॉल हुईं। इनमें से कुछ उन्होंने खुद कीं तो कुछ दूसरों की रिसीव कीं। पहली कॉल सुबह छह बजे करीब जयपाल ने दहगवां में किसी नंबर पर की तो शाम 7.20 पर उनकी आखिरी कॉल में शहर के नाहर खां सराय के मोबाइल टॉवर की लोकेशन है। कुल सात कॉल सवा मिनट की तो बाकी कॉल तीस से चालीस सेकेंड की रहीं। इतनी बड़ी संख्या में जल्दी-जल्दी कॉल होने से साफ जाहिर होता है कि उस दिन कोई बड़ा घटनाक्रम या डील हो रही थी जिसमें पल-पल अपडेट हो रहा था। 
पुलिस ने उन लोगों के नंबरों की भी जानकारी की, जिनसे ज्यादा बार बात हुई थी। जाहिर है कि इनमें से अधिकतर नंबर पार्टी नेताओं के हैं। इधर जयपाल शाक्य के मिलने के बाद ऐसे में कुछ लोग उनकी भूमिका भी संदिग्ध बता रहे हैं। पार्टी सूत्र इस घटनाक्रम को जयपाल शाक्य का खुद का रचा ड्रामा मान रहे हैं। 
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अध्यक्ष जी भी गुमराह कर रहे हमें
जयपाल शाक्य के भाई भगवान सिंह का कहना था कि जिलाध्यक्ष भी उन्हें गुमराह कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि उस दिन होटल में कोई मीटिंग नहीं थी जबकि बृजेश ने पुलिस को बताया है कि उस मीटिंग में ही उनके भाई को बुलाया गया था। ऐसे में आखिर हम किस पर भरोसा करें।
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वर्जन
जयपाल ने भले ही इस्तीफा दे दिया हो, पर वह हमारे पुराने साथी हैं। उनकी गुमशुदगी दर्ज कराने मैं खुद उनके परिवार के साथ थाने गया था। चार नवंबर को कोई मीटिंग नहीं थी। हम लोग उस होटल में खाना खाने गए थे। जयपाल खुद हम लोगों के पास आ रहे थे पर जानकारी मिली है कि होटल के नीचे तक आकर लौट गए। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। जो भी दोषी होगा, सामने आ जाएगा।
 - हेमेंद्र गौतम, जिला अध्यक्ष बसपा
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चार नवंबर को जयपाल शाक्य ने हमसे कहा कि उन्हें घर से कोई कागजात लाकर बदायूं के होटल में जिलाध्यक्ष और बड़े नेताओं को दिखाने हैं। मैंने अपने पुत्र बृजेश उर्फ कन्हैया को ड्राइवर के साथ कार लेकर भेज दिया। वह लौटकर बदायूं में होटल तक साथ आए। फिर कन्हैया से कहा कि मैं ऊपर देखकर आता हूं कि अध्यक्ष जी हैं या नहीं। जीने की सीढ़ियां चढ़कर लौट आए और पैदल ही कहीं निकल गए। 
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 - पुरुषोत्तम दास वार्ष्णेय, बसपा प्रत्याशी उझानी
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