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बीएसए दफ्तर से बाबू को उठा ले गए दबंग

Fri, 22 May 2015 07:03 PM IST
badaun
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बीएसए दफ्तर जहां अखाड़े, धरना-प्रदर्शन का केंद्र बनता जा रहा है। वहीं व्यक्तिगत मामलों में अब बाहरी लोगों की दबंगई भी हावी हो गई है। जी हां, शुक्रवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया। दफ्तर में घुसकर कुछ दबंग लोग एक बाबू को ही उठा ले गए। मामले को देख सभी कर्मचारी एकत्र हो गए और उन्होंने दूर जाकर बाबू को छुड़ा लिया। दर्जनों कर्मचारियों की भीड़ को देख दबंग रफूचक्कर हो गए। मामला उधारी से जुड़ा माना जा रहा है। इसकी पुलिस को सूचना नहीं दी गई। पूरे दिन दफ्तर में इसकी घटना की चर्चा रही।
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बेसिक दफ्तर में राजकीय, परिषदीय तथा सर्व शिक्षा अभियान के दो दर्जन से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। यहां परिषदीय का एक बाबू भी है। बताते हैं कि शुक्रवार को सुबह करीब आधा दर्जन लोग दफ्तर में आए और एक बाबू को पूछने लगे। जैसे ही वह दफ्तर के अंदर दाखिल हुए बाबू सामने मिल गया। उन्होंने तुरंत बाबू को पकड़ा और खींचते हुए बाहर ले जाने लगे। इससे पहले की अन्य कर्मचारी कुछ समझ पाते ये लोग बाबू को सड़क तक ले गए। चूंकि मामला दफ्तर के लिपिक का था, सो उसे बचाने के लिए पीछे-पीछे तमाम कर्मी आ गए। उन्होंने बाबू को छुड़ा लिया। एकत्र भीड़ को देख दबंग भी वहां से निकल लिए। बाद में पता चला की मामला उधारी से जुड़ा हुआ है। विभागीय कर्मचारियों ने लिपिक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। कई बार लोन की रिकवरी को लेकर भी बाबू को पूछने के लिए लोग दफ्तर आ चुके हैं। लिपिक पर लाखों रुपये का उधार है। हालांकि मामला रफा-दफा हो जाने के कारण पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। बताते हैं कि इसी कार्यप्रणाली के चलते उस पर कई बार कार्रवाई भी हो चुकी हैं। कुछ समय के लिए सुधार हो जाता है। फिर वहीं आलम हो जाता है। बताते हैं कि कार्यप्रणाली खराब होने के कारण कई बार साथी कर्मियों को भी झेलना पड़ा है।

कुछ लोग वरिष्ठ लिपिक को उठाकर ले जा रहे थे। कर्मचारियों ने मिलकर छुड़वाया है। हालांकि वाकया मेरे सामने नहीं हुआ। मामला निपट गया था, लिहाजा पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की गई। बाबू ने कराई हो तो कहा नहीं जा सकता है। कार्यप्रणाली बाबू की खराब रही है। इसमें सुधार जरूरी है। इससे विभाग की छवि भी धूमित होती है।
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-सोमनाथ विश्वकर्मा, प्रभारी बीएसए।
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