दातागंज (बदायूं)। सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित विवाहिता ने क्षेत्र के एक गांव में अपने मायके में रविवार को फंदे पर लटककर जान दे दी। वह बीते बुधवार को बरेली के एडीजी जोन दफ्तर पहुंची थी, वहां से आदेश मिलने के बावजूद पुलिस ने रिपोर्ट लिखने में चार दिन लगा दिए। साथ ही आरोपियों को भी पकड़ने की कोई कोशिश नहीं की। इसी से परेशान होकर महिला ने खुदकुशी कर ली।
रिश्तेदार तीन युवकों ने पिछले महीने महिला से दुष्कर्म किया था। बुधवार को एडीजी जोन से मिलकर पीड़िता ने शिकायत की थी। पुलिस को दी गई तहरीर में उसने बताया था कि उसका पति सिकंदराबाद (हैदराबाद) में रहकर सिलाई का काम करता है। फरवरी में तबीयत खराब होने पर वह उसहैत स्थित अपनी ससुराल से मायके दातागंज के गांव आ गई थी। 15 मई को वह दवा लेने दातागंज गई तो डॉक्टर ने उसे अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। इस पर वह बदायूं आई थी। वहीं बस अड्डे पर उसे तीनों रिश्तेदार युवक मिले। उन्होंने उसे बताया कि उसका पति बीमार है। वे लोग उसको देखने ही जा रहे हैं, चाहें तो वह भी उसके साथ चल सकती है।
बातों में आई महिला को वे तीनों सिकंदराबाद ले गए। यहां तीनों ने उसे एक कमरे में बंधक बना लिया और सामूहिक दुष्कर्म किया। उसके जेवर भी छीन लिए। एक सप्ताह बाद आरोपी उसे ट्रेन से दिल्ली ले जा रहे थे, जहां मौका पाकर एक यात्री से मोबाइल लेकर उसने अपने पिता को सारी बात बताई। इसके बाद पिता दिल्ली आए, जिसके बाद आरोपी वहां से फरार हो गए। पिता उसे लेकर दातागंज आए और पुलिस से शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद कई प्रार्थना पत्र पुुलिस को दिए गए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। बुधवार को तब वह एडीजी से मिली थी। रविवार को घटना होने के बाद एसपी सिटी जितेंद्र श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और जांच की।
विवाहिता 12 जून का एडीजी कार्यालय गई थी। दातागंज के सीओ ने 14 जून लिखित आदेश मिलने के बाद शनिवार को दातागंज थाने पर एफआईआर करवा दी थी। घटनास्थल सिकंदराबाद होने के कारण विवेचना वहां भेजा जाती, लेकिन उससे पहले ही खुदकुशी कर ली। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि विवाहिता अपने सगे भाई के साले के साथ रहती थी और तीन माह इसी के साथ रही है। इसके बाद दोनों में किसी प्रकार की नाराजगी हो गई। अब आगे जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -अशोक कुमार त्रिपाठी, एसएसपी
सुसाइड नोट ने खोली थाने वालों की पोल
दातागंज। दुपट्टे का फंदा बनाकर उससे लटककर जान देने वाली दुष्कर्म पीड़िता पुलिस सिस्टम से कितना परेशान हो गई थी, यह उसके सुसाइड नोट से ही स्पष्ट हो जाता है। साथ ही साफ हो जाता है कि पुलिस का सिस्टम अब भी कितना पुराना है, जिसमें न्याय देर से ही मिलता है, ज्यादातर तो मिलता ही नहीं है।
सुसाइड नोट के शुरुआत मौत की जिम्मेदारी खुद ली है। इसके बाद जो कुछ लिखा, वह दिल दहलाने वाला है। दूसरी ही पंक्ति में उसने लिखा है-थाने में जब भी जाओ तो कोई सुनता नहीं है। कोतवाल साहब हमारे पिताजी से उल्टी बातें करके वापस भेज देते थे। मुकदमा भी लिखना नहीं चाह रहे हैं। फिर लिखा-अगर साहब आपको पैसे से मुकदमा लिखना है तो एक बार बताओ तो सही, मैं तो इस दुनिया को छोड़कर जा रही हूं।
अब इस सुसाइड नोट और चार दिन की पुलिस की कार्यप्रणाली को समझा जाए तो साफ हो जाएगा कि किस तरह घिसा पिटा सिस्टम महिला की मौत का कारण बना। महिला के पिता के मौसेरे भाई बताते हैं कि 12 जून को एडीजी ने पूरी घटना जानने के बाद दातागंज के सीओ को तत्काल रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद लिखित आदेश का इंतजार किया जाता रहा। एसपी खुद बता रहे हैं कि 14 जून को आदेश मिलने के बाद सीओ ने आदेश कर दिए थे और अगले दिन 15 जून को रिपोर्ट लिखी गई। सवाल उठता है कि इस संवेदनशील मामले में लिखित आदेश आने का इंतजार क्यों जाता रहा, महिला से दूसरी तहरीर लेकर भी तो रिपोर्ट लिखी जा सकती थी। फिर 14 जून को आदेश हो गए थे तो दातागंज के ही थाने में रिपोर्ट लिखने में एक दिन क्यों लग गया। इसके साथ ही दातागंज थाना पुलिस मामले को लटकाने में लग गई, जांच हैदराबाद स्थानांतरित करना तय कर दिया। जबकि विवेचना तो यहीं हो सकती थी, क्योंकि बदायूं से ही तो उसे झांसा देकर ले जाया गया था। यानी यहीं से तो घटना की शुरुआत हुई थी। फिर भले ही पुलिस जांच स्थानांतरित कर देती, मगर आरोपियों को पकड़ने का काम कर सकती थी, ताकि महिला को तुरंत कुछ तो राहत मिलती। मगर पुलिस की संवेदनशीलता कहीं भी देखने को नहीं मिली।
पिता के मौसेरे भाई ने असलियत का और खुलासा किया, बताया-वह सीओ से भी मिले, उन्होंने तो आदेश कर दिए, मगर कोतवाली वाले कह रहे थे कि रिपोर्ट नहीं लिखी जाएगी। यानी टालमटोल जमकर हुई। महिला के एडीजी के पहुंचने की नौबत भी तभी आई होगी, जब दातागंज थाने वालों ने उसकी सुनी नहीं होगी। हालांकि थाने के इंस्पेक्टर अमृत लाल का कहना है कि उन्हें एक दिन पहले ही आदेश मिला था और तभी उन्होंने रिपोर्ट दर्ज कर ली।
एसएसपी साहब अब तो न्याय दिला देना
सुसाइड नोट में महिला ने लिखा है- एसपी साहब हो सके तो मुझे न्याय दिलाएं, आपकी अतिकृपा होगी। इस केस को बंद मत कर देना। आपसे यही विनती है, अलविदा। महिला ने सुसाइड नोट में आरोपियों के नाम का भी खुलासा किया है। यानी अब तो पुलिस को कार्रवाई करने के लिए कोई रुकावट नहीं होना चाहिए। आरोपियों में एक युवक महिला के भाई का साला है। इन तीनों ने हैदराबाद में कई दिन तक सामूहिक दुष्कर्म किया।
पति से मैं बहुत प्यार करती थी, ठुकराने से हो गई थी परेशान
महिला अपने पति को बहुत प्यार करती थी, यह बात उसके सुसाइड नोट में भी स्पष्ट है। इसमें लिखा है कि एक बार तो मेरा चेहरा देखने आ जाना। दरअसल दुष्कर्म की घटना के बाद पति ने उसे अपने साथ रखने से मना कर दिया था।
मायके वाले थे शादी में व्यस्त
विवाहिता ने आत्महत्या अपने पिता के घर में रविवार शाम को की। उस समय परिवार के लोग कुनबे में हो रहे निकाह कार्यक्रम में व्यस्त थे। परिवार का एक बच्चा घर लौटा तो फंदे पर लटकी महिला को देखकर चीख पड़ा। पिता समेत पड़ोस के लोगों ने शव को नीचे उतार लिया। सूचना के बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।