धोखाधड़ी कर बैनामा करा लेने में फर्जी पत्नी समेत सात लोगों पर चार्जशीट
पांच साल पुराने फर्जी बैनामा के मामले में क्राइम ब्रांच ने की थी जांच आरोपियों में तत्कालीन लेखपाल का नाम शामिल, गवाह भी फंसे
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। करीब पांच साल पहले एक महिला को मृत व्यक्ति की पत्नी बताकर उससे करीब दो बीघा जमीन का बैनामा करा लिए जाने के मामले में नामजदगी की विवेचना कर रही क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। विवेचना के दौरान क्राइम ब्रांच ने उस महिला को भी खोज लिया जो गायत्री पत्नी ओमकार बनकर पेश हुई थी। वह बरेली जिले में भमोरा थाना क्षेत्र के गांव दलीपपुर निवासी दर्शन की पत्नी राजेश्वरी निकली। खरीदार और तत्कालीन लेखपाल समेत सात लोगों पर आरोप तय किया गया है।
मोहल्ला गंजशहीदा निवासी पूरनलाल ने वर्ष-2013 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट के मुताबिक- पूरनलाल के तीन भाइयों में ओमकार की वर्ष 1991 में मृत्यु हो गई थी। इससे दो साल पहले ओमकार की पत्नी गायत्री देवी की भी मृत्यु हो गई। ओमकार की कोई संतान भी नहीं थी लेकिन मोहल्ले के राजेंद्र सिंह, राधाकृष्ण यादव और बालिस्टर सिंह ने वर्ष-2013 में किसी गायत्री नामक महिला को उपनिबंधक कार्यालय में पेश कर करीब दो बीघा जमीन का बैनामा करवा लिया। तत्कालीन लेखपाल मंजुल कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अभिलेखों में हेराफेरी की। गायत्री के गवाह गिरीशचंद्र पाठक और चंद्रभान की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। पूरनलाल की रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज नहीं की तो उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी।
धोखाधड़ी के मामले की विवेचना शुरू में कोतवाली पुलिस ने की लेकिन बाद में पूरनलाल की आपत्ति के बाद विवेचना को क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया था। क्राइम ब्रांच के विवेचक मदनलाल ने जांच के दौरान उस महिला को खोज निकाला जिसके जरिए फर्जी बैनामा कराया गया था। वह भमोरा थाना क्षेत्र के गांव दलीपपुर निवासी दर्शन की पत्नी राजेश्वरी निकली। राजेश्वरी ने ही खुद को गायत्री बताया था। विवेचक ने पूरे मामले में राजेंद्र सिंह, राधाकृष्ण यादव, बालिस्टर, चंद्रभान, गिरीशचंद्र पाठक, लेखपाल मंजुल कुमार और राजेश्वरी के खिलाफ चार्जशीट तैयार की जिसे चार दिन पहले कोर्ट में दाखिल कर दिया गया।