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पड़ताल : ढाई करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में सामने नहीं आ सके दोषी

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बदायूं। जिले में चर्चित खाद घोटाले के अलावा ढाई करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला भी हुआ था। मामला संज्ञान में आने पर अधिकारियों ने पहले इसकी जांच कराई, जिसमें 65 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। इनमें स्कूल के प्रधानाचार्य, मदरसा प्रबंधक, कई बैंक मैनेजर तक नामजद किए गए। विवेचना ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) कर रही है। इसे तीन साल हो चुके हैं लेकिन अब तक आरोपी बेनकाब नहीं हुए हैं।
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15 मई 2019 को सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता विभाग राघवेंद्र सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। दरअसल इसकी शिकायत शेखूपुर विधायक रहे धर्मेंद्र शाक्य ने 9 मार्च 2018 को तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह से की थी। उनका आरोप था कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। स्कूली बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। डीएम के आदेश पर समाज कल्याण विभाग, जिला अल्पसंख्यक एवं कल्याण विभाग, जिला प्रोबेशन विभाग एवं जिला दिव्यांगजन कल्याण विभाग की जांच कराई गई।
जांच ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक कराई गई। इसमें पता चला कि चारों विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों, जिला सहकारी बैंक के शाखा प्रबंधकों, स्कूल, मदरसा के प्रबंधक संयुक्त रूप से मिलकर बड़ा गोलमाल कर रहे हैं। सामने आया कि उन्होंने अब तक 2,47,79,723 (दो करोड़ 47 लाख 79 हजार 723) रुपये का बड़ा घोटाला किया है। जांच आख्या डीएम को दी गई। तब उन्होंने आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता विभाग राघवेंद्र सिंह की ओर से थाना सिविल लाइंस में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई। शुरुआती दौर में इस घोटाले को गंभीरता से लिया गया। इसके लिए एसआईटी गठित की गई लेकिन बाद में इंस्पेक्टरों के ट्रांसफर होने से इसे बंद कर दिया गया। करीब छह माह तक सिविल लाइंस थाना पुलिस मामले की विवेचना करती रही। बाद में यह मामला ईओडब्लू (आर्थिक अपराध शाखा लखनऊ) को ट्रांसफर हो गया। वहीं से अब इसकी विवेचना चल रही है। कई बार ईओडब्ल्यू के अधिकारी बदायूं आकर छानबीन कर चुके हैं लेकिन अब तक मामले में चार्जशीट नहीं लगी है।
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छात्रवृत्ति घोटाले की एफआईआर थाना सिविल लाइंस में दर्ज हुई थी। इसकी विवेचना ईओडब्ल्यू कर रही है। उनसे प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई थी लेकिन फिलहाल नहीं मिली। क्या चल रहा है, यह वहीं से पता चलेगा।
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- प्रवीन सिंह चौहान, एसपी सिटी
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