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बस केवल शुरू होकर रह गईं जांचें, नतीजे पर पहुंचतीं तो जेल में होते हवाला के धंधेबाज

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बदायूं। बिसौली इलाके में जो हवाला के धंधेबाज सक्रिय हैं, उसकी एक वजह ये भी है कि पूर्व में जो जांचें शुरू हुईं थीं, वे आज तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचीं। इससे हौसले और भी बुलंद होते गए और वे लोगों को अपना शिकार बनाते गए। अगर वो जांचें पूरी हो गई होतीं, तो शायद आज सभी धंधेबाज जेल में होते।
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तत्कालीन एसडीएम बिसौली गुलाब चंद ने वर्ष 2015-16 में एक जांच कमेटी गठित की थी। इसके बाद, बिसौली इलाके में सक्रिय हवाला के धंधेबाज चंद दिनों में करोड़पति कैसे बन गए थे, वे कैसे रुपया कमा रहे थे, उनके खातों का विवरण क्या था, इस धंधे से कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसकी जांच की पूरी तैयारियां हो गईं थीं। इस कमेटी में पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया गया था। कुछ दिन तक इसकी जांच चली लेकिन बाद में मामला ठप हो गया। उसी दौरान बिसौली पुलिस को पचास लाख से नीचे धनराशि के कई चेक मिले थे। ये चेक डाक द्वारा दबतोरा के एक व्यक्ति नाम आए थे। वो चेक बिसौली पुलिस के कब्जे में थे। कुछ दिन इसकी भी जांच चली, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल गया। इसके अलावा एक खास बात ये रही पुलिस के आर्थिक साठगांठ के कई मामले सामने आए। एक दरोगा को निलंबित तक किया गया था। इसमें कुछ सिपाहियों के नाम भी उजागर हुए थे। हवाला के मामलों में जिन सिपाहियों या दरोगा को भेजा गया, वहीं मामले को ठंडा करने में सबसे आगे रहे। अगर पुलिस प्रशासन सख्ती से काम करता तो शायद अब तक सभी हवाला के धंधेबाज जेल में होते और एटीएस को ज्यादा भागदौड़ न करनी पड़ती। लोगों को चूना नहीं लगता।
चुनाव लड़ने की फिराक में धंधेबाज
हैरानी की बात ये है कि जो धंधेबाज धोखाधड़ी के मामलों में जेल जा चुके हैं। उनके खिलाफ पुलिस को पक्के सबूत मिले थे। आज वह चुनाव लड़ने की फिराक में है। उनके इलाके में जगह-जगह पोस्टर लगे हैं। कोई किसी पार्टी से चुनाव लड़ने की तैयारी में है तो कोई सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा है। कुछ दिन पहले बरेली जिले में चार हवाला के धंधेबाज पकड़े गए थे। उनके पास लाखों में नकदी भी बरामद हुई थी। उनमें एक धंधेबाज ने खुद को मीडिया कर्मी बताया था। बरेली पुलिस ने तो उसे छोड़ दिया लेकिन बाद में कराई गई जांच में उसका नाम भी धंधेबाजों में शामिल है।
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सहसवान में दिन भर रही चर्चा
एटीएस द्वारा साइबर ठगी के मामले में जिन लोगों को पकड़ा गया है उनमें सहसवान का रहने वाला अंशुल कुमार सक्सेना भी शामिल है। उसके पकड़े जाने के बाद सहसवान में यह चर्चा का विषय रहा। उसके आसपड़ोस के लोगों के अनुसार जब भी वह यहां आता था तो अमरोहा के हसनपुर में खुद को एक मोबाइल नेटवर्क कंपनी में अधिकारी बताता था।
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