फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भैंस को पूंछ पकड़कर बाहर खींचते समय तालाब में गिरा किशोर डूबा, मौत

विज्ञापन
उझानी में तालाब में किशोर के डूबने के बाद मौके पर जुटे लोग। - फोटो : BADAUN
विज्ञापन
उझानी (बदायूं)। घर से पशु चराने के लिए बच्चों के साथ निकला किशोर तालाब में डूब गया। उसने तालाब में घुसी भैंस को बाहर निकालने के लिए पूंछ पकड़ी थी, लेकिन भैंस पीछे लौटने की बजाय गहरे में चली गई। किशोर भी पूंछ के साथ ही तालाब में खिंचता चला गया। यह देख साथी बच्चों के शोर मचाने पर उसके परिवार के लोग भी रोते-बिलखते मौके पर दौड़ कर पहुंचे। तैराक युवकों ने करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद उसे तालाब से खोज निकाला। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
विज्ञापन

हादसा नरऊ के तालाब में शुक्रवार दोपहर में हुआ। कोतवाली क्षेत्र के गांव मीहलाल नगला निवासी आशीष यादव (12) पूर्वाह्न में पशुओं को चराने के लिए तालाब के पास पहुंचा। उसके साथ गांव के ही तीन-चार बच्चे भी थे। अचानक आशीष की भैंस तालाब में घुसने लगी। उसने पूंछ पकड़कर भैंस को बाहर खींचने की कोशिश की। इसी दौरान पैर फिसलने से वह तालाब में गिर पड़ा फिर भी उसने भैंस की पूंछ को नहीं छोड़ा। खींचता हुआ वह तालाब में गहरे में चला गया। साथी बच्चों की चीख पुकार के बाद जुटे लोगों के पहुंचने से पहले ही आशीष ओझल हो गया। माता-पिता समेत परिवार के लोग और ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। नरऊ और मीहलाल नगला निवासी तैराक तीन-चार युवक भी उसे खोजने के लिए तालाब में कूद पड़े। करीब दो घंटे बाद आशीष को खोजकर बाहर निकाल लिया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। पुलिस के कहने पर घरवाले आशीष को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे। चिकित्साधीक्षक डॉ. राजकुमार गंगवार ने देखते ही उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक आशीष अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसके भाई-बहन अखिलेश, आकाश और पूनम तालाब किनारे ही रोते-बिलखते रहे। पुलिस ने अस्पताल से आशीष का शव उसके घरवालों के हवाले कर दिया है।
तालाब में डूबने से पूर्व में हो चुकी है बालिका समेत युवक की मौत
उझानी नरऊ के तालाब की गहराई काफी अधिक है। करीब डेढ़ सौ बीघा के रकबा में फैले तालाब के आसपास खेत हैं। करीब दो साल पहले गांव अचौरा निवासी छोटेलाल का साला नहाते समय तालाब में डूब गया था। उसका शव पांच घंटे बाद मिला था। तीन महीना पहले नरऊ निवासी मोहनलाल की बेटी हिमांशी खेत पर जाते समय पैर फिसलने से तालाब में डूब गई थी। उसकी भी जान नहीं बच पाई। ग्रामीणों में महावीर सिंह ने बताया कि तालाब की गहराई अधिक होने की वजह से लोग अपने बच्चों को खेतों की ओर नहीं भेजते हैं। फिर भी अगर कोई तालाब में डूब जाए तो बच नहीं पाता।
विज्ञापन

भू-गर्भ तक असर पहुंचने से दूषित हो चुका है हैंडपंपों का पानी
उझानी तालाब में उझानी के नालों का पानी पहुंचता है। उससे सटे गांवों में नरऊ, मलिकपुर और मीहलाल नगला हैं। नाले के पानी की वजह से तीनों गांवों में ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल मुहैया नहीं हो पाता। इसी साल दूषित पानी पीने की वजह से नरऊ गांव की महिला समेत दर्जना की संख्या में लोग बीमार पड़े गए थे। चार की मौत भी हो गई। इसके बाद ग्रामीणों ने गुस्से का इजहार करना शुरू किया तो मंडलायुक्त, डीएम और शेखूपुर के विधायक समेत कई अफसरों ने दो-तीन बार मौके पर पहुंचकर हकीकत पर गौर किया लेकिन अब तक कोई समाधान सामने नहीं आया है। हालांकि अप्रैल महीना में नाले के पानी का बहाव दूसरी तरफ मोड़ने के लिए पालिका ने अस्थायी नाले की खुदाई भी कराई थी। फिर नाले का पानी तालाब में ही गिरता है।
तालाब में डूबने से किशोर की मौत की सूचना के बाद कछला से भी गोताखोरों को बुलाया गया था, लेकिन स्थानीय युवकों की कोशिश से आशीष के शव को बाहर निकाल लिया गया। ग्रामीणों से कहा गया है कि वह अपने बच्चों को तालाब की ओर नहीं जाने दें।- ओमकार सिंह, प्रभारी निरीक्षक।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें