बदायूं। पहले कहा जाता था कि माता कुमाता नहीं होती, लेकिन इस कलियुग में यह शब्द अर्थ खोते जा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण है कि शनिवार सुबह रोडवेज बस स्टैंड पर घटी एक घटना। यहां एक महिला ने अपने रोते बच्चे को चुप कराने में विफल होनेे पर उसके गाल पर न सिर्फ थप्पड़ लगाए बल्कि उसका गला दबाते हुए उसे पास बह रहे नाले में फेंक दिया। एक मां की इस क्रूरता को देख रहे दंपती ने आननफानन में बच्चे को नाले से निकाल लिया। इसकी सूचना पर पुलिस महिला को थाने ले गई। बाद में परिवारवालों को बुलाकर महिला को उनके हवाले कर दिया।
महिला उझानी कस्बे के एक मोहल्ला की रहने वाली है। वह शनिवार सुबह करीब सात बजे अपने छह माह के बेटे को लेकर रोडवेज बस स्टैंड पहुंची थी। वह बस से उतरकर स्टैंड के सामने राजकीय इंटर कॉलेज की दीवार किनारे जाकर सड़क पर बैठ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उस समय महिला का बच्चा रो रहा था। वह बच्चे को चुप कराने पर गुस्सा हो रही थी। जब बच्चा चुप नहीं हुआ तो वह अपना आपा खो बैठी। उसने मासूम को दो चार थप्पड़ लगाए। इससे बच्चा और जोर से रोने लगा। इससे महिला और ज्यादा आक्रोशित हो गई। गुस्से में आकर उसने मासूम का गला दबाना शुरू कर दिया। उसी समय स्टैंड और सड़क पर मौजूद लोगों ने उसे गला दबाते हुए देख लिया। वह बच्चे को बचाने के लिए दौड़े, लेकिन उन्हें देखकर महिला ने बच्चे को नाले में फेंक दिया।
यह देखकर एक दंपती तुरंत नाले में कूद गए। उन्होंने बच्चे को बाहर निकाल लिया। बच्चा नाले में गिरने से कीचड़ में सन गया था। उन्होंने पानी लाकर बच्चे को नहलाया। तब तक मौके पर दर्जनों लोग जमा हो गए। उसी समय किसी ने सिविल लाइंस पुलिस को सूचना दे दी, जिससे पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने उससे जानकारी जुटाकर परिवार वालों को सूचना दी। करीब एक घंटे बाद उसके परिवार वाले भी थाने पहुंच गए। उसके पति और सास ने बताया कि महिला बड़ी ज्यारत जाने के लिए घर से निकली थी। उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। इससे पुलिस ने महिला को परिवार वालों के हवाले कर दिया। परिजन उसे अपने साथ उझानी ले गए हैं। इस मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
-महिला दिमागी रूप से कमजोर है। परिवार वाले कह रहे थे वह एक-दो बार पहले भी ऐसी हरकत कर चुकी है। वह महिला का इलाज करा रहे हैं। इससे महिला को उसके परिवार वालों के हवाले कर दिया गया है।
सुधाकर पांडेय, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस