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दो गुटों में चल रहे आ रहे संघर्ष के चक्कर में हुई हत्या

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उझानी। सरेशाम एसबीआई उझानी में छात्रों के दो गुटों के बीच पहले से चल आ रहे विवाद के कारण युवक की हत्या हो गई। पुलिस के अनुसार दोनो गुटों में पहले भी कई बार टकराव हो चुका है। लेकिन मामला दब गया। टकराव की वजह लड़की बताई जा रही है। इस बात को स्पष्ट तौर पर तो किसी ने नहीं कहा। लेकिन चर्चा जोरों पर है। पुलिस अधिकारी भी इस ओर इशारा कर रहे हैं।
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बताते हैं कि शमीम अपने दोस्त कछला निवासी गौरव के साथ अक्सर उझानी आता था। हत्यारोपी कक्षा 11 का छात्र भी अपने दोस्त अमन के साथ अक्सर नगर में बाइक से घूमते देखा जाता था। पहले भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ है। रविवार को बात बढ़ गई।
शमीम पांच बहनों के बीच अकेला भाई होने की वजह से परिवार का लाड़ला भी था। इधर, कक्षा 11 का छात्र भी रसूखदार परिवार से है। दोनों के बीच करीब डेढ़ महीने पहले एक लड़की को लेकर तन गई थी। ऐसे में दोनों एक दूसरे को नीचा दिखाना चाहते थे। हालांकि, कोतवाली पहुंचने के बाद पुलिस को दिए बयान में आरोपी छात्र ने ऐसा कुछ नहीं बताया है, लेकिन हर ओर लड़की ही चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस शमीम के साथियों के साथ आरोपी छात्र के दोस्त अमन की भी तलाश कर रही है। अमन के पिता नरेंद्र यादव को हिरासत में ले लिया गया है। एसपी सिटी जितेंद्र यादव का कहना है कि प्रथम दृष्टया छात्रों के बीच विवाद घटना का कारण है। सभी पहलुओं पर जांच कराई जाएगी। अभी ज्यादा कुछ कहना संभव नहीं है।
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छात्रों के पास कहां से आया तमंचा
बड़ा सवाल यह भी है कि छात्रों के पास तमंचा और कारतूस कहां से आए। संभव है कि लाड़-प्यार मेें परिवार वाले उसकी गलतियों को नजरअंदाज कर रहे थे। ऐसे में एक परिवार ने अपना बेटा खो दिया और एक परिवार का बेटा हत्यारोपी बन गया। इंस्पेक्टर विनोद कुमार चाहर का कहना है कि तमंचा कहां से आया इसकी भी जांच कराई जाएगी। फिलहाल विवाद में शामिल सभी छात्रों की गिरफ्तारी पर जोर है।
दो घंटे सीएचसी में रखा रहा शव
उझानी। घटना स्थल से कोतवाली की दूरी करीब 400 मीटर है। आईटीआई छात्र शमीम उर्फ समीर राणा को गोली मारने के बाद कक्षा 11 का छात्र सीधे दौड़कर कोतवाली पहुंचा। उसने ही पुलिस को हत्या की सूचना देते हुए गुनाह कबूल लिया। तुरंत ही इंस्पेक्टर विनोद कुमार चाहर गए। शव कब्जे में लेने के बाद आधार कार्ड के जरिए शिनाख्त की। शमीम की जेब से मोबाइल और पर्स भी मिला। गोली मारे जाने के बाद उसके साथ आए दोस्त मौके से भाग निकले थे। शव उझानी सीएचसी लाया गया। यहां शमीम को मृत घोषित करने की कार्रवाई में एक घंटे से ज्यादा वक्त लग गया। क्योंकि साढ़े छह बजे उझानी सीएचसी पर फार्मासिस्ट और चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के अलावा कोई डॉक्टर मौजूद ही नहीं था।
भीड़ जुटने से गर्माया माहौल, बुलानी पड़ी फोर्स्र
मृत घोषित करने के पहले पुलिस शमीम के परिवार वालों को सूचना दे चुकी थी। इसके चलते सीएचसी पर कुछ ही देर में भीड़ जमा होने लगी। ऐसे में एहतियात के तौर पर मुजरिया और कादरचौक से भी फोर्स को बुला लिया गया। शमीम को मृत घोषित करने के लिए आयुष डॉ. प्रभाकर मिश्रा को पुलिस ने मोबाइल पर कॉल करके बुलाया। इसके बाद उसे मृत घोषित करने की कार्रवाई पूरी हो सकी। इसमें एक घंटे से ज्यादा वक्त लग गया। इस दौरान शमीम के परिवार वालों के साथ भारी भीड़ जमा हो चुकी थी। दो समुदायों का मामला होने की वजह से तनाव बढ़ता जा रहा था। पुलिस के सामने भीड़ के बीच शमीम का शव सीएचसी उझानी से पोस्मार्टम को भेजना चुनौती बन गया। एसपी सिटी जितेंद्र श्रीवास्तव भी पहुंच गए। आखिर पुलिस ने करीब दो घंटे के बाद पुलिस शव यहां से निकाल सकी।
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