बदायूं। कुपोषण के खिलाफ सरकार लगातार जंग लड़ रही है। इसको लेकर शासन ने अफसरों की भी जवाबदेही तय करते हुए उनको भी गांव गोद लेना के निर्देश दिए थे। ऐसे में कुपोषण मिटाने के लिए शासन के निर्देश पर अधिकारियों ने 56 गांवों को गोद लिया था। पिछले माह विभाग के द्वारा इन 56 गांवों को कुपोषण मुक्त घोषित करते हुए अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। जबकि अधिकांश अधिकारी पूरे साल गांव में झांकने तक नहीं गए। ऐसे में गांव को कुपोषित मुक्त घोषित होने पर विभाग पर सवाल उठाने शुुरू हो गए हैं।
जिले में पोषण मिशन कार्यक्रम लागू होने के बाद कुपोषण से बच्चों को मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया गया। उसके बाद में बाल पोषण माह मनाकर कुपोषित बच्चों का चयन किया। अति कुपोषित बच्चों को लाल श्रेणी में रखकर इनका इलाज करने के लिए जिला अस्पताल में एनआरसी भेजा जाता है। जहां 15 दिनों तक बच्चों को भर्ती कर उपचारित किया जाता है। दरअसल, जिले में शून्य से लेकर छह वर्ष तक के चार लाख से ज्यादा बच्चे हैं। इसमें काफी संख्या में कुपोषित व अति कुपोषित बच्चे चिन्हित किए गए थे। कुपोषित बच्चों की बड़ी संख्या देख अफसरों ने कुपोषण से बच्चों को मुक्त कराने की कवायद शुरू की थी। इसमें जिला स्तरीय अधिकारियों ने 56 गांवों को गोद लिया था। उस समय से अफसर बदलते रहे, लेकिन कुपोषण मुक्त कराने की मुहिम भी चलती रही। हालात ये थे कि कुछेक अधिकारी को छोड़ दें तो अधिकांश अधिकारी एक-दो बार के बाद गांव में झांकने तक नहीं गए। इसके बाद भी इन 56 गांव को विभाग ने कुपोषिण मुक्तकर दिया है।
अधिकारियों द्वारा 56 गांवों को गोद लिया गया था। वह गांव कुपोषित मुक्त घोषित हो चुके हैं। इसकी लिस्ट शासन को भेजी है। अब वहां से टीम आकर गांव की जांच करेंगी। - आदीश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी