बदायूं। मासूम बालिका से दुष्कर्म के पांच साल पुराने मामले में नामजद रिश्ते के चाचा को मुजरिम ठहराते हुए स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट राजकुमार तृतीय ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मुजरिम पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा होने पर संपूर्ण धनराशि बालिका को उसकी देखभाल व पढ़ाई के लिए देने का भी कोर्ट ने आदेश दिया है।
थाना बिनावर क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने 20 जनवरी 2016 को एक पत्र दिया था कि 25 दिसंबर 2015 की दोपहर में उसके रिश्ते के देवर ने उसकी तीन साल की बेटी से दुष्कर्म किया। बाद में पुत्री ने उसे यह जानकारी दी। महिला ने आरोपी माता पिता और परिजन को सारी घटना बताई तो उन लोगों ने उसे घर में कैद कर दिया और कहा कि अगर उसने रिपोर्ट दर्ज कराई तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। वह मौका पाकर थाना बिनावर पहुंची।
पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की तब वह आईजी बरेली रेंज से मिली। एक माह बाद आईजी के आदेश पर थाना बिनावर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।
स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट राजकुमार तृतीय ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक अमोल जौहरी, वीरेंद्र वर्मा और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुना। कोर्ट ने नामजद आरोपी को अबोध बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया। कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही मुजरिम पर 30 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। संवाद