बदायूं। 10 साल पुराने हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश सारिका गोयल ने नामजद पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामले में नामजद एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। जबकि एक आरोपी नाबालिग है। इससे उसकी पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को प्रेषित कर दी गई है। कोर्ट ने पिता-पुत्र पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मूसाझाग थाना क्षेत्र के गांव करौतिया निवासी बालिस्टर ने दो अगस्त 2012 को एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक उनका भाई सुशील 27 जुलाई 2012 को शाम सात बजे ट्यूबवैल से घर लौट रहा था। रास्ते में उनके भाई सुशील को गांव के ही पंकज, उसके पिता रामदत्त, वीरपाल और नाबालिग लड़का मिला। उन्होंने पूछा कि तुम लोग कहां जा रहे हो। सुशील ने कहा कि वह ट्यूबवैल की ओर से घूम कर आ रहे हैं लेकिन सुशील काफी रात तक घर नहीं आया। इस पर उन्होंने सुशील को काफी तलाश किया लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। 29 जुलाई 2012 को सुशील का शव गांव के पास सत्येंद्र के खेत में पड़ा मिला। बालिस्टर के मुताबिक उनके भाई सुशील के 60 हजार रुपये रामदत्त पर आ रहे थे। इसी वजह से पंकज, उसके पिता रामदत्त, वीरपाल समेत चारों आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस ने विवेचना करने के बाद रामदत्त, उसका बेटा पंकज, वीरपाल और नाबालिग आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अपर सत्र न्यायाधीश सारिका गोयल ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी ओमपाल कश्यप और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुना। कोर्ट ने पिता-पुत्र रामदत्त और पंकज को हत्या के जुर्म में मुजरिम ठहराया। कोर्ट ने पंकज और रामदत्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और साथ ही दोनों दोषसिद्ध मुजरिम पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। संवाद