बदायूं। साढ़े पांच साल पुराने एक दहेज हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम न्यायाधीश गोपाल जी ने नामजद पति, सास और ससुर को मुजरिम ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई है। उन पर 39 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
उझानी कोतवाली क्षेत्र के गांव ननाखेड़ा निवासी दुर्गेश गुप्ता ने 27 अप्रैल 2016 को वजीरगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक पुत्री सपना का विवाह तीन मार्च 2013 को वजीरगंज निवासी सुनील वार्ष्णेय के साथ किया था। शादी के बाद से ही सपना के ससुराल वाले पति सुनील, सास कुसुमलता और ससुर सुभाष वार्ष्णेय आए दिन मारपीट करते थे। सपना से दहेज में बाइक लाने की मांग करते थे। सपना ने अपने पिता दुर्गेश से कई बार इसकी शिकायत की। इस पर दुर्गेश ने सपना के ससुराल वालों को समझाया भी और कहा कि वह इंतजाम करके बाइक दिलवा देंगे। 27 अप्रैल 2016 को उन्हें सूचना मिली कि उनकी बेटी सपना को सुनील, कुसुमलता और सुभाष वार्ष्णेय ने केरोसिन डालकर आग लगाकर मार दिया है। इस पर पुलिस ने सुनील, कुसुमलता और सुभाष वार्ष्णेय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश गोपाल जी ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियोजन की ओर से एडीजीसी मुनेंद्र प्रताप सिंह और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद सुनील, कुसुमलता और सुभाष वार्ष्णेय को मुजरिम ठहराया। कोर्ट ने तीनों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही कोर्ट ने तीनों पर 39 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। संवाद