बदायूं। साढ़े छह साल पहले जानलेवा हमले में नामजद पिता-पुत्र सहित चार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने मुजरिम करार देते हुए सभी को 10-10 साल की सजा सुनाई है, साथ ही सभी पर 63 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
जानलेवा हमले की वारदात थाना जरीफनगर के गांव समसपुर गंग में 11 अप्रैल 2013 को हुई थी। गांव निवासी श्योराज पुत्र हीरा सिंह ने घटना वाले दिन रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक वह खेत से घर वापस आया तो गांव के रामेश्वर पुत्र मुंशी, रामेश्वर का पुत्र कुंवरपाल, भगवान सिंह पुत्र नेकराम, रामपाल पुत्र खुशीराम उसके घर में घुस आये। सभी ने गाली गलौज करते हुए कहा कि तुम्हारे बच्चों ने हमारे बच्चों को क्यों मारापीटा। इसी बात को लेकर चारों ने मारपीट शुरू कर दी। भगवान सिंह ने लाइसेंसी बंदूक से जान से मारने की नीयत से फायर किया, जिससे उसका सगा भाई पूरन और चचेरा भाई कालीचरन गंभीर रूप से घायल हो गए। उसने चारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने विवेचना के बाद सभी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमेश चंद्र दिवाकर ने अभियोजन की ओर से प्रभारी डीजीसी अनिल सिंह राठौर और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलों को सुनने के बाद रामेश्वर और उसके बेटे कुंवरपाल समेत रामपाल और भगवान सिंह को मुजरिम ठहराया और दस-दस साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने कुंवरपाल पर 18 रुपये का जुर्माना तथा शेष तीनों पर 15-15 हजार का जुर्माना लगाया है।