बदायूं। स्वास्थ्य विभाग और सरकार से निराशा मिलती देखकर जिला अस्पताल के संविदा कर्मचारी मंगलवार को धरने पर बैठ गए। उन्होंने नारेबाजी कर संविदा खत्म न करने की मांग की। इस दौरान अस्पताल में अव्यवस्थाएं फैल गईं। पर्चा बनवाने से लेकर ओपीडी और दवा काउंटर पर मरीजों की लाइन लग गई। वहीं वार्डों में मरीजों को काफी दिक्कत हुई।
मंगलवार सुबह धरने पर बैठे संविदा कर्मचारियों ने सीएमएस को पांच सूत्री ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों का धरना दोपहर दो बजे तक चलता रहा। इस दौरान कर्मचारियों ने अस्पताल में कोई कार्य नहीं किया, जिसका असर मरीजों और तीमारदारों पर पड़ा। खिड़की नंबर एक पर कर्मचारी कम होने से पर्चा बनवाने वाले मरीजों की लंबी लाइन लग गई, जो दोपहर डेढ़ बजे तक खत्म नहीं हुई। जैसे-तैसे सरकारी कर्मचारियों ने मरीजों का रजिस्ट्रेशन कर पर्चा बनाया। इसी तरह ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श से लेकर दवा लेने में मरीजों को काफी दिक्कत हुई। इस धरना प्रदर्शन के दौरान कोई संविदा स्टाफ नर्स वार्ड में नहीं पहुंची। इससे सरकारी स्टाफ नर्सों को ही जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। संविदा के लैब टेक्नीशियन और असिस्टेंट से लेकर अन्य पदों पर तैनात कर्मचारी भी धरना प्रदर्शन में मौजूद रहे। इस दौरान अंसार हुसैन, दीपेश कुमार, हरिकिशन, जीतू कुमार, पिंटू सिंह, शानू खान, राजीव कुमार, सर्वेश कुमार, रूबी आदि मौजूद रहे।
संविदा कर्मचारियों की ये रहीं मांगे
संविदा कर्मचारियों की मांग है कि सभी नॉन पैरामेडिकल कर्मचारियों का प्रस्ताव पास करके नौकरी पर बहाल किया जाए। यूपीएचएसएसपी (उत्तर प्रदेश हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट) के सभी कर्मचारियों को एनएचएम में संविदा पर समायोजित किया जाए। सेवा प्रदाता फर्म की व्यवस्था समाप्त की जाए। समायोजन की प्रकिया होने तक प्रदेश स्तरीय टेंडर द्वारा एजेंसी का चयन शासन द्वारा किया जाए और उनकी सेवाएं जारी रखी जाएं। 60 वर्ष की आयु तक नौकरी सुरक्षित की जाए। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की स्थायी नीति तत्काल लागू की जाए।
अस्पताल गेट पर गश खाकर गिरा मरीज
मंगलवार को जिस दौरान संविदा कर्मचारियों का धरना प्रदर्शन चल रहा था। उस समय एक मरीज अस्पताल गेट पर गश खाकर गिर गया। मरीज काफी देर तक गेट पर पड़ा रहा लेकिन तब तक अस्पताल के किसी कर्मचारी ने उसे नहीं उठाया और न ही उसे भर्ती किया। बताते हैं मरीज बड़ी ज्यारत से आया था। वह कई दिन से बीमार चल रहा था। उसके परिवार वाले उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन उसे भर्ती नहीं किया गया। बाद में परिवार वाले उसे लेकर चले गए।