आसरा आवास में लेवल-वन के अस्थायी कोविड अस्पताल में ड्यूटी कर रहे कछला के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. महेश प्रताप सिंह ने डॉक्टरों के इस्तेमाल के लिए आई चीन निर्मित पीपीई पहनने से इनकार कर दिया है। उन्होंने किट की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ चीनी सामान के बहिष्कार की बात हो रही है और दूसरी ओर वहीं की निर्मित किट हमें पहनने को दी जा रही है। मुझे चाहे नौकरी से निकाल दिया जाए लेकिन यह किट नहीं पहनूंगा। उन्होंने इसका वीडियो भी बनाकर वायरल किया है।
स्वास्थ्य विभाग में चीनी पीपीई किट कैसे और क्यों पहुंच रही हैं। इस पर डॉ. महेश प्रताप सिंह ने सवाल उठाए हैं। वह आसरा आवास बदायूं में संचालित लेवल-वन के कोविड अस्पताल में करीब पांच दिन से ड्यूटी कर रहे हैं। ड्यूटी तो उन्होंने उस समय भी की जब लेवल-वन का कोविड अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर संचालित था। उनका कहना है कि तब डॉक्टरों समेत स्वास्थ्य कर्मियों को जो पीपीई किट मुहैया कराई गईं, उनकी पैकिंग पर मेड-इन-चाइना का मार्का नहीं लगा था। अब जो किट उपलब्ध कराई जा रही है, उन पर मेड इन चाइना का मार्का चस्पा है।
बकौल डॉ. महेश शुक्रवार रात में ड्यूटी के दौरान जब उन्होंने पीपीई किट पहनी तो वह फट गई। साइज में भी वह छोटी थी। ऐसा भी नहीं कि डॉ. महेश ने इसकी चर्चा अपने समकक्ष और स्वास्थ्य कर्मियों से नहीं की हो। वह साफ शब्दों में कहते हैं कि जब हमारे देश के प्रति चीन ने हर स्तर पर नुकसान पहुंचाने का षडयंत्र रचा है तो उसके इस उत्पाद पर भी रोक होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान की तारीफ की।
बोले- जब देश स्तर पर चीनी आइटम का विरोध हो रहा है तो स्वास्थ्य विभाग में चीनी पीपीई किट का इस्तेमाल क्यों। यह हकीकत सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि कई डॉक्टर इस किट को लेकर विभागीय अफसरों से शिकायत कर चुके हैं। अंत में उन्होंने यही बताया कि चीनी पीपीई किट का इस्तेमाल बंद नहीं हुआ तो डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की सेहत पर संक्रमण का खतरा बना रहेगा। डॉ. महेश ने अपनी पूरी बात की वीडियो भी बनाई है।
भोजन पर भी उठाया सवाल
उझानी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कछला के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. महेश प्रताप सिंह ने आसरा आवासों में भर्ती कोरोना संक्रमितों को भोजन और नाश्ते की गुणवत्ता भी खराब बताई। उनका दावा है कि नाश्ते में ब्रेड पकौड़ा और समोसा तैलीय हैं। खाने में चावल खराब होने की शिकायत मरीज कर चुके हैं। मेन्यू में दूध मुहैया कराने का जिक्र है लेकिन ऐसा नहीं होता। अगर दूध ही नहीं मिलेगा तो मरीज च्यवनप्राश नहीं खा पाएंगे।
बता दें कि पिछले सप्ताह संक्रमित होने पर उझानी के दो सिपाही खानपान की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए खुद को डिस्चार्ज कराके अगले दिन राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गए थे।
ये पीपीई किट कहां से आ रही है। हम उस बारे में कुछ नहीं कह सकते। हमें तो डीएम साहब और स्वास्थ्य विभाग की एसोसिएशन ने पीपीई किट उपलब्ध कराई है। इससे ज्यादा कुछ नहीं जानते। बाकी डॉ. महेश ज्यादा जानते हैं। उनसे ही पूछ लें।
ये मामला मेरे संज्ञान में भी आया है। हमारे पास मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन से पीपीई किट आ रहीं हैं। अब एमओआईसी कौन सी किट पहने थे, ये तो वही जानते होंगे। हम इस संबंध में इनको कारण बताओ नोटिस जारी कर रहे हैं। ये कई मामलों में विवादित रहे हैं। उनका जवाब आने के बाद ही अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कुमार प्रशांत, डीएम