बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कोरोना के संदिग्ध मरीजों के स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज कर घर भेजना शुरू कर दिया है। ताकि जरूरत पड़ने पर कॉलेज में ज्यादा से ज्यादा बेड खाली हो सकें और कोरोना वायरस से संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया जा सके।
कोरोना वायरस के चलते देश भर में रविवार को जनता कर्फ्यू रहा। वहीं, रविवार रात प्रदेश सरकार ने बरेली समेत 15 जनपदों को 23 से 25 मार्च तक लॉकडाउन कर दिया। सोमवार को पीलीभीत में एक कोरोना पीड़ित मिला था। जिसकी वजह से पीलीभीत को भी लॉक डाउन कर दिया है। इधर बदायूं में भी लगातार कोरोना के संदिग्ध मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ऐसे में जिला अस्पताल में बेडों की संख्या सीमित है। वहीं एहतियात के तौर पर जिले के सभी अस्पतालों में पहले से ही ओपीडी को बंद कर दिया गया।
इसी के तहत राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी को भी बंद कर दिया गया है। वहीं प्रशासन के निर्देश पर कॉलेज प्रशासन ने भर्ती मरीज जो थोड़े से भी स्वस्थ हुए हैं, उनको घर भेजना शुरू कर दिया है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यह कदम कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए उठाया जा रहा है, ताकि कॉलेज के अधिक से अधिक बेड खाली रहें, क्योंकि अगर संदिग्धों की संख्या बढ़ी, तो बेड खाली होना बेहद जरूरी है।
बदलेगा कर्मचारियों का रोस्टर
राजकीय मेडिकल कॉलेज में 31 मार्च तक ओपीडी को बंद कर दिया गया है। ऐसे में कर्मचारियों की जो ड्यूटी अभी तक जिस रोस्टर के हिसाब से लगाई गई थी, उसमें बदलाव किया जा रहा हैं। कॉलेज प्रशासन द्वारा दो टीम बनाई जा रही है। जो कोरोना संदिग्ध मिलने पर उनका इलाज करेंगी। यह टीम कॉलेज में शिफ्टों में काम करेंगी।
जिस तरह से कोरोना संदिग्धों की संख्या लगातार बढ़ रही है उसे देखते हुए प्रशासन से वार्ता हुई थी। जो भी व्यक्ति कुछ स्वस्थ लग रहा है, उसको छुट्टी दी जा रही है, ताकि कॉलेज में ज्यादा से ज्यादा बेड खाली हो सकें।
- डॉ. आरपी सिंह, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज