बदायूं। राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य चार साल से ठप है। निर्माण कार्य कब से शुरू होगा, यह बता पाने की स्थिति में खुद कॉलेज प्राचार्य नहीं हैं। वह राजकीय निर्माण निगम के निदेशक को पांच पत्र भेजे जानी की बात कहकर अपना बचाव कर रहे हैं। वहीं कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के महाप्रबंधक का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय से अनुमति मिले तो हम काम शुरू करें। अधिकारी एक-दूसरे को पत्र भेजकर अपना पक्ष मजबूत कर रहे हैं और खामियाजा मरीज भुगत रहे हैं।
प्राचार्य एनसी प्रजापति ने कॉलेज में 24 अगस्त को मेडिकल कॉलेज से संबंधित लंबित कार्यों की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने 18 सितंबर 2023, 15 दिसंबर 2023, 4 जनवरी 2024, 10 जनवरी को पत्र राजकीय निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक को भेजे। पत्र में कहा गया है कि जनवरी की दोनों बैठकों में राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक सिविल द्वारा प्रतिभाग नहीं किया गया। न ही निर्माण शुरू कराया गया है।
मेडिकल कॉलेज के संचालन को देखने वाली संस्था नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की टीम का निरीक्षण होना है। राजकीय निर्माण निगम की देरी से निर्माण अधूरा होने से मेडिकल कॉलेज के मानक पूरे नहीं हो रहे हैं। इसके कारण आगे विषम स्थिति उत्पन्न हो सकती है। परिसर में निवास कर रहे छात्र-छात्राओं, चिकित्सा शिक्षकों और कर्मचारियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। परियोजना प्रबंधक, सिविल को कई बार मौखिक रूप से भी अवगत कराया, लेकिन कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। पत्र में कहा गया है कि कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक को निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने के लिए निर्देश दिए जाएं।
सीटी स्कैन और एमआरआई का भवन नहीं बना
राजकीय मेडिकल कॉलेज में बड़ी उम्मीद से लोग आते हैं, लेकिन निर्माण कार्य अधर में लटका होने से पूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। सीटी स्कैन और एमआरआई का भवन तक नहीं बना है, इसलिए मशीनें भी नहीं मंगाई गईं हैं। इसके लिए मरीजों को सैफई और लखनऊ मेडिकल काॅलेज रेफर किया जाता है।
इन निर्माण कार्यों की शासन से मांगी अनुमति
राजकीय मेडिकल कॉलेज में दो लेक्चर रूम, मल्टी परपज हॉल, लिफ्ट, लेक्चर थियेटर, सात नए ऑपरेशन थियेटर, 303 बेड के लिए भवन, छात्रावास, पोस्टमार्टम हाउस व इंटर्न हॉस्टल के निर्माण के लिए प्राचार्य पत्राचार कर रहे हैं।
लागत बढ़ी तो आई अड़चन, 14 साल बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा
साल 2012 में मेडिकल कॉलेज का प्रोजेक्ट 650 करोड़ का था। निर्माण का ठेका लेने वाली संस्था और राजकीय निर्माण निगम के बीच मुकदमेबाजी होने की वजह से चार साल से निर्माण ठप है। प्रोजेक्ट की मंजूरी 2012 में हुई थी। निर्माण कार्य ठप होने से लागत बढ़ गई और जितना निर्माण होना है वह पिछली लागत में नहीं हो पा रहा है। राजकीय निर्माण निगम के महाप्रबंधक का कहना है अभी 100 करोड़ का बजट अवशेष है। अगर अनुमति मिल जाए तो जितना काम इस लागत में हो सकता है, वह करा सकते हैं। अभी शासन ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
ठेकेदार की संस्था ने केस कर दिया था। इसकी वजह से दो साल से मेडिकल कॉलेज का काम ठप है। अब काम शुरू करने के लिए अनुमति चाहिए। वहां से निर्देश मिलने पर ही काम फिर शुरू हो सकेगा। - दरवान सिंह, राजकीय निर्माण निगम के महाप्रबंधक
निर्माण कार्य की अनुमति के लिए जनवरी से अब तक पांच बार पत्राचार किया जा चुका है। शासन अनुमति प्रदान करे तो काम शुरू हो। हर माह बैठक करने के बाद शासन को पत्र भेजा जा रहा है। -डॉ. एनसी प्रजापति, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज