प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सन 2012 में गांधी जयंती पर साफ-सफाई की अलख जगाई और घर-घर में स्वच्छता अभियान का नारा देकर लोगों को जागरूक किया, लेकिन उनका मकसद पूरा नहीं हो सका। आज भी कई घोषित किए गए ओडीएफ और समग्र गांव ऐसे हैं जो सच्चाई के धरातल पर खरे नहीं उतरते। जगत ब्लाक के ओडीएफ घोषित गांव खरखोली खुर्द और म्याऊं ब्लाक के समग्र गांव के हालात बदतर है और कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास शौचालय नहीं हैं। गांव में आज भी जलभराव और गंदगी की समस्या बनी हुई है।
केंद्र और प्रदेश सरकार से लेकर पूरा प्रशासनिक अमला गांवों को गंदगी और खुले में शौच मुक्त करने के लिए जुटा है, लेकिन गांवों के ओडीएफ घोषित होने के बाद भी यहां स्थिति विपरीत है। यहां लोग आज भी खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। यही नहीं सफाई कर्मियों की लापरवाही से गांवों में गंदगी फैली है। जगत ब्लाक का गांव खरखोली खुर्द इस वित्तीय वर्ष में ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया, लेकिन गांव के कई परिवारों के पास शौचालय नहीं है, और जिनके पास हैं उन्होंने उन्हें प्रयोग में लेना बंद कर दिया है। ऐसे में लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। इस गांव की आबादी 1400 है। गांव के लोगों का कहना है कि करीब 100 परिवारों के पास शौचालय हैं। म्याऊं ब्लाक के गांव संजरपुर में दो सौ परिवार हैं। ये गांव 2012-13 में लोहिया समग्र गांव रहा। यहां 162 परिवारों के पास शौचालय हैं। इनमें से मात्र 50 शौचालय प्रयोग में हैं। शेष शौचालयों में उपले, लकड़ी और अन्य सामान भरा हुआ है। इसके अलावा गांव में गंदगी और जलभराव की समस्या है। लोगों का कहना है प्रधान और सचिव से कई बार कहा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।