पेयजल एवं स्वच्छता कार्यक्रम के तहत गांवों में पानी की जांच के लिए आईं करीब दो हजार किटें प्रधानों के घरों और ब्लाकों में रखे-रखे एक्सपायर हो जाएंगी। ग्राम पंचायत में दिए हुए इनको छह माह से अधिक बीतने को हैं, लेकिन इसके बाद भी अफसरों को सुध नहीं है।
करीब छह माह पहले जिले की हर ग्राम पंचायत के लिए एक-एक वाटर टेस्ट किट दी गई थी। यह किट प्रधान के सुपुर्द की गई थी। ताकि वे गांव में लगे हैंडपंपों के पानी की समय-समय पर जांच कराते रहें और उनकी टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर पेयजल स्वच्छता के उपाय किए जा सकें। इन किटों के जरिए हैंडपंपों के पानी की जांच अनिवार्य बताई गई थी। सूत्रों के मुताबिक जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 40 हजार से ज्यादा हैंडपंप लगे हैं। इस लिहाज से जिले में इन किटों के जरिए वाटर टेस्ट कराने थे, लेकिन अब तक कोई जांच रिपोर्ट पंचायत राज विभाग को प्राप्त नहीं हुई हैं। जाहिर है कि अधिकतर किटें ब्लाक स्तर पर और ग्राम प्रधान लेकर घर पर रखी हुई हैं।
अफसरों को नहीं है पता किटों के बारे में
जिला विकास अधिकारी सेवाराम चौधरी का कहना है कि किट कब आई थीं और किसको दी गई हैं। किटें ब्लाक पर रखी हैं या फिर प्रधानों के घरों पर इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिशासी अभियंता जलनिगम से बात की जाएगी।
इस संबंध में पंचायत राज विभाग से पता किया तो कहा गया कि जल निगम से पता करना पड़ेगा। जल निगम विभाग से पता किया गया तो कहा गया कि पंचायत राज विभाग के लोग बताएंगे। ऐसे में जाहिर है कि वाटर टेस्टों किटों की जानकारी किसी को नहीं है।