पहले चरण में मतदान पूरी तरह से शांतिपूर्वक निपटा था सो प्रशासन ने दूसरे चरण के मतदान के लिए पूरी तैयारी की थी। बूथों के आसपास बेवजह लोग नहीं भटकें इसके लिए पर्याप्त पुलिस बल को तैनात किया गया था। बावजूद इसके देखने में आया कि बूथों के नजदीक लोग चौपालें लगाकर बैठे थे। विकासखंड सालारपुर और उझानी क्षेत्र के कई बूथों पर देखा गया कि लोग शांति से मतदान कर रहे थे लेकिन चौपालों पर बैठे लोग अपने समर्थित प्रत्याशी की हार-जीत का ही गणित लगा रहे थे। चूंकि पंचायत चुनाव में एक-एक वोट का काफी महत्व होता है इसलिए प्रत्याशियों के समर्थक भी पूरे दमखम के साथ जुटे हुए थे।
चौपालों पर बैठे लोगों में सभी प्रत्याशियों के समर्थक भी थे। जो कि जातिगत और अपने प्रत्याशी की छवि के आधार पर उसी की जीत सुनिश्चित बता रहे थे। कई लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह चुनाव विधानसभा और लोकसभा से विभिन्न होता है,उसकी वजह होती है कि इस चुनाव में प्रत्याशी लोकल होते हैं और उसकी हर बात को ध्यान में रखकर ही मतदाता वोट देता है।
मुस्लिम महिलाओं में मतदान के प्रति रहा था खासा उत्साह
पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में मुस्लिम महिला मतदाताओं में वोट डालने को लेकर बेहद उत्साह दिखा। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के सभी बूथों पर महिला मतदाताओं की शाम तक लाइनें लगीं रहीं। कई बूथों पर देर शाम तक वोटिंग होती रही।
निर्वाचन आयोग चाहता है कि हर चुनाव में सभी मतदाता अपने मताधिकार के प्रयोग करें। इसके लिए विधानसभा और लोकसभा चुनावों में समय मतदान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए। शायद उसी की वजह रहीं है कि आज पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में हुए मतदान में मुस्लिम महिलाओं में वोट डालने को लेकर काफी उत्साह था। शेखूपुर स्थित बूथों पर भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहां के हर बूथ पर महिला मतदाताओं की लाइनें लगीं हुईं थीं। इसके अलावा प्रत्याशी और उनके समर्थक भी महिला मतदाताओं को घरों से निकालकर बूथ तक ले जा रहे थे। शेखूपुर की तरह ही निजामपुर, खेड़ा बुजुर्ग, इस्लामगंज आदि स्थानों के बूथों पर भी मुस्लिम महिलाओं की लाइनें लगीं हुईं थीं।
महिला मतदाताओं से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जो भी मतदाता होते हैं उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। वो भी ऐसे मौके को गंवाना नहीं चाहतीं इसलिए वो वोट डालने जा रहीं हैं।