संवाद न्यूज एजेंसी बदायूं। प्रदेश सरकार ने जनता की शिकायतों और समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए जनसुनवाई की व्यवस्था लागू कर रखी है। इसके लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे का समय तय है। अधिकारियों को तय समय पर कार्यालय में मौजूद रहकर लोगों की फरियादें सुननी होती हैं। लेकिन बदायूं के अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों को उनका इंतजार करना पड़ता है। कलक्ट्रेट स्थित कई कार्यालयों की मंगलवार को पड़ताल में 10:15 बजे तक कई जगहों पर ताले लटके थे, तो कहीं कुर्सियां खाली पड़ी थीं। हालांकि एडीएम प्रशासन अरुण कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार और एडीएम (एफआर) डॉ. वैभव गुप्ता समय से कार्यालय आए और लोगों की समस्याएं सुनते नजर आए। सिटी मजिस्ट्रेट 10:18 बजे तक अपने कार्यालय पहुंचे। लेकिन अन्य अधिकारी 10:30 बजे के बाद ही कार्यालय पहुंचे।
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सुबह : 10:16 बजे
सहायक श्रमायुक्त का कक्ष मिला खाली
-सहायक श्रमायुक्त श्वेता गर्ग का कार्यालय सुबह 10:16 बजे तक खाली था। लोग बाहर खड़े उनका इंतजार कर रहे थे। विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि मैडम कुछ देर में आ जाएंगी, लेकिन इंतजार में खड़े लोगों का कहना था कि अगर अधिकारी समय से आएं तो काम समय पर निपट सकता है। यह हाल सरकारी जनसुनवाई के अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।
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सुबह : 10:18 बजे
पूर्ति कार्यालय की कुंडी नहीं खुली
-जिला पूर्ति कार्यालय का मुख्य गेट 10:18 बजे तक बंद मिला। जिला पूर्ति अधिकारी सतीश कुमार मिश्रा और कर्मचारी दोनों अनुपस्थित थे। बाहर कई लोग अपने काम के लिए उनका इंतजार कर रहे थे। सहसवान निवासी आरिफ ने बताया कि मैं राशन कार्ड बनवाने आया था। तहसील में बताया गया कि पूर्ति अधिकारी से मिलो, लेकिन यहां तो अभी तक ताला ही लटका है। सरकारी कार्यालयों में इस तरह की लापरवाही से आमजन को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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सुबह : 10:20 बजे
राजस्व अधिकारी की कुर्सी खाली
-जिला राजस्व अधिकारी प्रियंका का कार्यालय भले ही समय पर खुला मिला, लेकिन 10:20 बजे तक अधिकारी खुद मौजूद नहीं थीं। फाइलें व्यवस्थित रखी थीं, पर कुर्सी खाली थी। यहां कुछ लोग अपनी समस्याओं को लेकर इंतजार करते नजर आए। उनका कहना था कि वे सुबह से यहां हैं, लेकिन अधिकारी नहीं आने से उनका काम अटका हुआ है। जनता को राहत देने वाली व्यवस्था खुद देरी की शिकार बन रही है।
सुबह : 10:27 बजे
खान अधिकारी के कार्यालय पर ताला, जनता बेबस
-जिला खान अधिकारी गुलशन कुमार का कार्यालय 10:27 बजे तक बंद मिला। दरवाजे पर ताला लटका था और बाहर लोग अपने कार्य को लेकर इंतजार करते नजर आए। लोगों ने कहा कि अगर अधिकारी समय पर पहुंचे तो छोटे-छोटे कार्यों के लिए बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ें। लेकिन हकीकत यह है कि जनसुनवाई के समय पर खुद अधिकारी ही अनुपस्थित रहते हैं।
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क्या बोले लोग
-हम राशन कार्ड की समस्या को लेकर सुबह से ही यहां पर बैठे हैं। हर कार्यालय के बाहर ताले लगे हैं, अधिकारी समय से बैठें तो जनता को राहत मिले, लेकिन यहां पर ऐसा नहीं हो रहा है। -हरीश पटेल, मूसाझाग
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अपनी समस्या को लेकर खान अधिकारी से मिलने आया था। यहां पर लोग इस उम्मीद से आते हैं कि उनकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन अधिकारी समय से नहीं बैठ रहे हैं, तो समस्याओं का समाधान कैसे होगा। -चिरंजीवी, गुलड़िया
सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक सभी सरकारी अधिकारियों का कार्यालय में बैठने का समय है, यदि कोई अधिकारी समय से कार्यालय नहीं पहुंच रहा है तो इसकी जांच कराकर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सभी अधिकारी अपने दायित्व का निर्वहन कर शासन के नियमानुसार कार्य करें। - अवनीश राय, जिलाधिकारी बदायूं
जिला खान अधिकारी के कक्ष में पड़ा ताला। संवाद
जिला खान अधिकारी के कक्ष में पड़ा ताला। संवाद
जिला खान अधिकारी के कक्ष में पड़ा ताला। संवाद
जिला खान अधिकारी के कक्ष में पड़ा ताला। संवाद
जिला खान अधिकारी के कक्ष में पड़ा ताला। संवाद