प्रत्येक ग्रामसभा को हर साल 10 हजार रुपये गांवों में मच्छररोधी दवाओं, तालाबों, नाले-नालियों में कीटनाशक दवाओं और चूना छिड़काव के लिए दिए जाते हैं। जिले की 885 ग्राम पंचायतों को इस मद में 88.50 लाख रुपये हर साल मिलते हैं। चालू वित्तीय वर्ष में यह ग्राम पंचायतें गांवों में स्वच्छता के नाम पर 55 लाख रुपये खर्च कर चुकी हैं। इसके बावजूद जिले के तमाम गांवों में संक्रामक रोग दस्तक दे रहे हैं। तीन गांवों में 22 लोगों की मौत हुई, तो शासन तक हिल गया। लखनऊ से डायरेक्टर पैरामेडिकल डॉ. एसएन राय हालात का जायजा लेने बदायूं पहुंचे, लेकिन अब तक किसी का ध्यान इस पर नहीं गया है कि स्वच्छता के नाम पर खर्च हुए 55 लाख रुपये कहां गए।
सफाई कर्मचारी भी कर रहे मनमानी
बदायूं। पंचायती राज विभाग के अंतर्गत गांवों में सफाई करने के लिए सफाई कर्मचारी रखे गए हैं। यह सफाई कर्मचारी भी खुलकर मनमानी कर रहे हैं। तमाम गांव ऐसे हैं जहां सफाई कर्मचारी सालों से नहीं पहुंच रहे। यहां गंदगी के ढेर लगे हैं। उपरैला, मेवली और करनपुर में फैले संक्रामक रोगों की वजह गंदगी बताई गई। इसके बावजूद पंचायती राज विभाग ने सफाई कर्मचारियों की मनमानी पर शिकंजा नहीं कसा है।
रूपापुर, सूरजपुर में भी दस्तक
बदायूं। अलापुर के गांव रूपापुर और सूरजपुर में भी संक्रामक रोगों ने दस्तक दे दी है। दोनों गांवों में एक दर्जन से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित हैं। लक्षण देखकर डॉक्टर इसे मलेरिया मान रही हैं। संक्रामक रोग सेल प्रभारी डॉ. कौशल गुप्ता और डॉ. हरदत्त कुमार ने दोनों गांवों का दौरा कर स्थित जानी। ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा वितरण हुआ और स्लाइड बनाई गई।
ग्रामीण स्वच्छता समितियों को भी साफ सफाई पर ध्यान देना चाहिए। प्रत्येक ग्राम सभा को हर साल 10 हजार रुपये इसके लिए अलग से दिए जाते हैं। गांवों में संक्रामक रोग फैलने की मुख्य वजह गंदगी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें अपना काम कर रही हैं। स्थिति नियंत्रण में है।-डॉ. नरेंद्र कुमार, सीएमओ