दबतोरी में हुई चौपाल के दौरान अपनी बात रखते ग्रामीण। संवाद
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दबतोरी। विधानसभा चुनाव के लिए जिले में 21 जनवरी से नमांकन होने हैं। 14 फरवरी को मतदान होगा। इससे पहले गांवों में चुनावी चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। गांवों की चौपालों पर शीतलहर के बीच अलाव ताप रहे लोगों में इन दिनों जो सबसे ज्यादा चर्चा है वह चुनावों की ही है। गांव के लोगों का कहना है कि नेता जब वोट मांगने आएंगे तो वह अपनी समस्याओं को उनके सामने रखेंगे। गांव के लोगों को प्रत्याशियों से काफी उम्मीदें हैं।
बिसौली विधानसभा क्षेत्र के तहत आने दबतोरी बड़ी आबादी वाली ग्राम पंचायत है। इसके आसपास संग्रामपुर, दबथरा, लक्ष्मीपुर भी बड़ी आबादी की ग्राम पंचायतें हैं। चुनावों में इन ग्राम पंचायतों के मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रहती है। दबतोरी में कुछ सहूलियतें हैं तो कई की अब भी दरकार है। ग्रामीणों की खेती-किसानी और व्यापार से जुड़ी समस्याएं भी हैं।
आसफपुर ब्लॉक के तहत आने वाली ग्राम पंचायत दबतोरी की आबादी पांच हजार से ज्यादा है। बिसौली विधानसभा सीट से भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस प्रत्याशी तय होने के बाद यहां चुनावी रंग चटख होने लगा है। गांव में चौपाल पर बैठे अजीम खां का कहना है कि कोरोना काल में सरकार ने मुफ्त अनाज देकर काफी सहूलियत दी है। शमशाद ने कहा कि भाजपा सरकार में विकास कार्य ठप हो गए हैं। सपा सरकार में जितना विकास हुआ उतना भाजपा में नहीं हुआ। अशोक कुमार सिंह ने कहा कि योगी सरकार में गुंडाराज पूरी तरह से खत्म हो गया है। पूर्व प्रधान प्रेमपाल सिंह यादव भी पीछे नहीं रहे। उनका कहना है कि भाजपा सरकार ने गुमराह करने का काम किया है। गरीबों, पिछड़ों का कोई भला नहीं हुआ। बेरोजगारी चरम पर है। बब्बू ने कहा कि बसपा सरकार में ही विकास का पहिया घूमता है। गांव के विनोद का कहना था कि इस बार चुनाव स्थानीय मुद्दों पर होगा। चुनाव के समय नेता वायदे कर देते हैं और फिर पांच साल के बाद ही वापस आते हैं। इस बार पांच साल का हिसाब लिया जाएगा। संवाद