कादरचौक (बदायूं)। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम धनूपुरा और भोजपुर में शुक्रवार से राशन कार्ड और आय प्रमाण पत्र बनना शुरू हो गए, लेकिन जाति प्रमाण पत्र पर अभी मंथन चल रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि उनके जाति प्रमाण पत्र बनवाये जाएं। वह भीख मांगकर गुजारा कर लेंगे लेकिन अपराध नहीं करेंगे। सुबह एसडीएम सदर और तहसीलदार सदर ने गांव पहुंचकर विकास कार्यों का जायजा लिया।
शुक्रवार सुबह पूर्ति निरीक्षक संजय चौधरी धनूपुरा और भोजपुर गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से जानकारी जुटाई। इसके साथ ही उन्होंने सर्वे शुरू करा दिया है। अब तक जिन लोगों के नाम प्रकाश में आए हैं। उनके राशन कार्ड बनना शुरू हो गए हैं। दूसरी ओर ग्रामीणों के आय प्रमाण पत्र बनवाये जा रहे थे। बताते हैं कि धनूपुरा और भोजपुर में अधिकतर लोग राजवोरा जाट (बाबरिया) जाति के हैं। उत्तर प्रदेश में जातिगत आंकड़ों के अनुसार इनकी जाति सूची में शामिल नहीं है। इससे दोनों गांव के लोगों के जाति प्रमाण पत्र बनना मुश्किल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह भीख मांगकर गुजारा कर लेंगे लेकिन अपराध नहीं करेंगे। इसके लिए सरकार कम से कम उनके जाति प्रमाण पत्र बनवाये, जिससे वो भी तरक्की कर सकें।
सुबह दोनों गांव में एसडीएम सदर पारसनाथ मौर्य और तहसीलदार सदर रामनयन सिंह भी पहुंचे। उन्होंने दोनों गांवों का भ्रमण करते हुए विकास कार्यों का जायजा लिया। धनूपुरा गांव में पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए नींव खुदाई का कार्य शुरू हो गया है। इसके लिए मजदूर लगे हुए हैं।
लड़की पर आईं देवी, बोलीं-गांव में सबकुछ ठीक हो रहा
इसे अंधविश्वास कहें या आस्था, यह कहना मुश्किल होगा। धनूपुरा और भोजपुर के लोग भुवाल माता को मानते हैं। उनकी पूजा करते हैं। वही उनकी कुलदेवी हैं। बताते हैं कि गुरुवार शाम कई लोग भुवाल माता के मंदिर पर बैठे थे। तभी एक लड़की खेलने लगी। गांव वाले बोले कि लड़की पर भुवाल माता आ गईं हैं। वह लड़की बोली, गांव में पहली बार कुछ अच्छा हुआ है। अब गांव में शराब नहीं बेची जाएगी और न ही लोग चोरी करेंगे।
वर्ष 2012 में अमर उजाला ने की थी पहल
वर्ष 2012 में अमर उजाला ने एक पहल शुरू की थी। इसके तहत धनूपुरा गांव में पुलिस ने बगैर रिकॉर्ड के चार लोगों की हिस्ट्रीशीट खोली थी। अमर उजाला ने जब ये खबर प्रकाशित की तो एसएसपी मंजिल सैनी ने एसओ रहे जेपी यादव को तलब किया। कहा था लेकिन पुलिस के पास कोई रिकॉर्ड नहीं था। उस समय दोनों गांव में आठ हिस्ट्रीशीटर थे। एसएसपी के आदेश पर उनके नाम हटाये गए। आज भोजपुर में एक हिस्ट्रीशीटर है।
सीओ को दीं ‘उम्मीद की चिट्ठियां’
शायद इसी को विश्वास कहते हैं कि धनूपुरा और भोजपुर के करीब डेढ़ सौ महिलाओं, लड़कियों और युवाओं ने अपनी-अपनी समस्या लिखकर सीओ अनिरुद्ध सिंह को चिट्ठियां दी हैं। किसी ने लिखा है कि उनके पास मकान नहीं है। झोपड़ी पड़ी है, किसी ने लिखा है कि उसके पास न तो जगह है और न ही मकान है। वह दूसरे की जगह में रह रहे हैं। इनमें अधिकतर लोगों ने बच्चों को शिक्षित कराने की मांग की है। इस पर सीओ ने कहा कि लोगों ने एक विश्वास पर उन्हें चिट्ठियां लिखी हैं। वह एक-एक चिट्ठी को पढ़ रहे हैं। उनकी समस्या नोट कर रहे हैं, जिससे उनकी समस्या का समाधान कराया जा सके।
धनूपुरा के रास्तों पर लगाये बैरियर
सीओ अनिरुद्ध सिंह के आदेश पर धनूपुरा के रास्तों पर बैरियर लगा दिए गए हैं। यहां पर पुलिस तैनात की जाएगी। गांव वालों को भी लगाया जाएगा, जिससे वह अपने गांव की निगरानी कर सकें। यहां आने-जाने वाले लोगों के नाम भी नोट किए जाएंगे। इन गांव में ककराला वासियों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। प्रभारी एसओ सुनील कुमार ने गांव पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था चेक की और बैरियर लगवाए।