बदायूं। प्रशासन की ध्यान क्या हटा, भूमाफिया दोबारा सोत नदी के किनारों को कब्जाने में जुट गए। प्रशासन ने जिस बरातघर को पिछली बार जमींदोज कर दिया था, उसके ठीक बराबर में अतिक्रमण किया जा रहा है। हालांकि इस बार पिछली बार से ज्यादा जगह घेरी गई है। फिलहाल भूमाफिया चहारदीवारी बनवाकर इसमें मिट्टी का भराव करने में जुटे हुए हैं। इसी बीच राज्यमंत्री महेश गुप्ता की नजर इस पर पड़ी तो उन्होंने जिला प्रशासन को निर्माण रुकवाने के आदेश दिए। राज्यमंत्री ने कहा कि यहां किसी भी हाल में अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा।
पिछले दो वर्षों में शासन प्रशासन की सख्ती के बाद सोत नदी पर हो रहे कब्जों पर कार्रवाई शुरू की गई। एक के बाद एक अतिक्रमण ध्वस्त कराए गए। पिछली 21 सितंबर को तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने नदी पर कब्जा कर बनाए गए एसएस लॉन को जमींदोज करा दिया। हालांकि इतने पर भी भूमाफियाओं के हौंसले पस्त नहीं हुए। सोत नदी पर एक बार फिर कब्जों का सिलसिला शुरू हो गया। अबकी बार नया निर्माण एसएस लॉन के बिल्कुल पास में शुरू किया गया है। इसे भूमाफिया का दुस्साहस ही कहेंगे कि पिछली बार जिस जगह से लॉन तोड़ा गया उससे भी ज्यादा जमीन पर कब्जा सोत नदी पर करके चहारदीवारी करवाई गई है। लॉन के बराबर ही बड़ा सा गेट बनाकर अंदर की जमीन पर भराव पड़वाया जा रहा है लेकिन प्रशासन ने इस ओर से नजरें फेर रखी हैं। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने कहा कि सोत नदी पर अतिक्रमण किया गया है लेकिन इसे ध्वस्त किया जाएगा। किसी भी हाल में नदी पर अतिक्रमण नहीं होने दिया जाएगा।
किसी स्कूल वाले का काम बता रहे मजदूर
सोत नदी के किनारे जिस जगह पर कब्जा कर चहारदीवारी उठवाई जा रही है, वहां कुछ मजदूर मिट्टी और रोड़ा डालने का काम कर रहे थे। मजदूरों को यह नहीं मालूम था कि यहां निर्माण कौन करा रहा है लेकिन इतना जरूर कहा कि किसी स्कूल वाले के कहने पर काम कर रहे हैं। स्कूल वाला कौन है, उसका नाम तो मजदूर नहीं बता सके लेकिन इतना जरूर है कि बिना राजनीतिक या प्रशासनिक शह के यह काम मुश्किल है। बता दें कि एसएस लॉन का निर्माण भी बीज भंडार के नाम से जगह लेकर कराया गया था। बीज भंडार के नाम से यहां कब्जा किया गया और फिर आलीशान बरातघर बनवा लिया गया।
राज्यमंत्री ने ही उठाया था सोत नदी पर अतिक्रमण का मुद्दा
सोत नदी पर अतिक्रमण का मुद्दा नगर विकास राज्यमंत्री एवं नगर विधायक महेश गुप्ता ने ही उठाया था। वह नदी पर अतिक्रमण किए जाने के मामले में शुरू से ही गंभीर रहे हैं। उन्होंने इस मामले में कई बार शासन तक से शिकायत की जिसके कारण प्रशासन ने इस पर सख्ती करते हुए कई अतिक्रमण यहां से ढहा दिए थे।