उझानी (बदायूं)। पड़ोसी गांव नरऊ वालों के सामने करीब दो दशक से तालाब में नालों के गंदे पानी को लेकर उत्पन्न समस्या से जल्द निजात मिलने की उम्मीद है। नगर पालिका परिषद ने डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनवाकर तालाब पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण डीएम के मार्फत शासन को भेजा है। करीब एक करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनने के बाद न तो इलाके में लोगों को गंदे पानी के फैलाव और भूगर्भीय जल के दूषित होने व इसके पड़ने वाले दुष्प्रभाव से राहत मिल सकेगी।
ब्लॉक क्षेत्र के गांव नरऊ में उझानी कस्बे के नालों का गंदा पानी पहुंचता है। कस्बे से तालाब की दूरी करीब पौने एक किलोमीटर है। करीब दो दशक पहले तालाब में नालों के पानी का प्रवाह बढ़ गया। उसी समय से नरऊ निवासी लोगों के लिए मुसीबत झेल रहे हैं। साल दर साल स्थिति खराब होती गई और ग्रामीणों की दिक्कत यहां तक बढ़ गई कि बारिश न होने पर भी तालाब के पानी से आसपास के इलाके के खेतों में फसलें बर्बाद होने लगीं। इस बार जनवरी और फरवरी महीने में लोगों के हैंडपंपों में दूषित पानी भी आने लगा। इसका सीधा असर ग्रामीणों की सेहत पर भी पड़ा। इसके बाद मार्च के शुरूआत में मंडलायुक्त समेत डीएम और प्रशासनिक अफसरों ने तालाब को देखा तो उन्हें भी ग्रामीणों की दिक्कतों का अहसास हुआ।
इसके बाद नगर पालिका परिषद ने तालाब पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनवाने के लिए डीपीआर तैयार कराई। डीपीआर ईओ डॉ. डीके राय ने पिछले दिनों डीएम को सौंप दी। डीएम के जरिए अब इसे शासन को भेज दिया गया है। करीब एक करोड़ की लागत से बनने वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए शासन स्तर से मंजूरी मिल जाने के बाद जल निगम निर्माण कार्य शुरू कराएगा। बता दें कि प्रस्ताव से पहले ही डीएम के आदेश पर जल निगम के अफसरों ने भी तालाब और उसके आसपास इलाके का निरीक्षण किया था।
ट्रेनों समेत रोडवेज बसों की धुलाई में इस्तेमाल होगा प्लांट का पानी
उझानी। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद उसके पानी के इस्तेमाल को लेकर प्रस्ताव भेजते समय ईओ डॉ. डी.के राय ने बताया कि पानी का सदुपयोग होगा। ट्रेन के डिब्बों की धुलाई के लिए रेलवे, रोडवेज बसों की धुलाई को राज्य सड़क परिवहन निगम और इलाके के किसान फसलों की सिंचाई के लिए प्लांट के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि प्लांट से साफ किया गया पानी पीने योग्य नहीं होगा। इसके लिए पालिका को ही कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
दूषित पानी से महिलाओं समेत चार मरे तो पालिका ने कराई थी नाले की खुदाई
उझानी। नरऊ के तालाब की वजह से घरों के हैंडपंपों का पानी दूषित होने के बाद उसे पीते रहने से ग्रामीणों को पानी से जुड़ी बीमारियों ने जकड़ लिया था। फरवरी तक तीन महीने के अंदर महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई। मरीजों की संख्या में भी इजाफा होता चला गया। स्वास्थ्य विभाग को भी मौके पर डॉक्टर भेजकर गांव में स्वास्थ्य शिविर लगवाने पड़े। इसके बाद पालिका ने कादरचौक रोड किनारे गांव फतेहपुर तक अस्थायी नाले की खुदाई करा दी लेकिन कस्बे के नालों का पानी उस ओर नहीं पहुंच पाया। नालों का पानी अभी भी नरऊ के तालाब में गिरता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
नरऊ के तालाब पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। प्लांट बन जाने के बाद इसका फायदा आसपास इलाके के लोगों को मिलेगा। शासन से मंजूरी मिलने के बाद धनराशि अवमुक्त होते ही निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- कुमार प्रशांत, डीएम।