बदायूं। पंजाब नेशनल बैंक बिसौली शाखा में यूपी पावर कॉरपोरेशन के चेकों की 64.52 लाख रकम हड़पने के मामले में रीजनल हेड बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधकों और कैशियरों को बचा गए। अब इस पर सवाल उठ रहे हैं। सोचने की बात है कि आखिर एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी, उसके पति और बेटे समेत सात नाते-रिश्तेदारों ने कैसे इतनी बड़ी रकम कैसे अपने निजी खातों में ट्रांसफर करा ली। वर्ष 2009 से 2019 तक पावर कॉरपोरेशन के चेकों का का भुगतान इनके निजी खातों में होता रहा। इस अवधि में तैनात रहे किसी शाखा प्रबंधक या कैशियर को इस बारे में पता ही नहीं लगा। यह संभव कैसे हो सकता है।
पीएनबी के रीजनल हेड प्रवीन जैन ने शनिवार को बिसौली कोतवाली में महिला चतुर्थश्रेणी कर्मचारी वीरबाला, उसके पति भोले, बेटे संजय समेत परिवार के बबिता पत्नी सुरजीत, चंद्रपाल पुत्र केहरी, संदीप पुत्र चंद्रपाल, अजीत पुत्र चंद्रपाल निवासी दबतोरी रोड बिसौली के खिलाफ साजिश रचने और धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। गौर करने वाली बात यह है कि 2009 से 2017 तक पीएनबी बिसौली में यशपाल वार्ष्णेय, डीबी सिंह, संदीप कुमार, हेतराम भारती की बतौर शाखा प्रबंधक तैनाती रही। इस दौरान राकेश कुमार, ललतेश वर्मा, अजय कुमार समेत करीब आधा दर्जन कैशियर भी तैनात रहे। घपलेबाजी में इनमें से किसी का नाम प्रकाश में नहीं आया है। इतनी बड़ी रकम नाजायज तरीके से एक महिला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और उसके परिवार के लोग कैसे अपने खातों में ट्रांसफर कर हड़प सकते हैं। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। रीजनल ऑफिस की ओर से कराई गई जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर जांच के दायरे में तत्कलीन शाखा प्रबंधकों और कैशियरों क्यों नहीं आए या उन्हें जानबूझ कर अनदेखा कर दिया गया। उनकी बिना मिली भगत के 64.52 लाख रुपये 85 बार में कैसे निजी खातों में ट्रांसफर हो गए। बैंक अधिकारियों को आठ साल तक इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी। हालांकि, इंस्पेक्टर पंकज लवानिया का कहना है कि जांच में सभी तथ्य सामने आ जाएंगे। इधर, बैंक प्रबंधन पूरे मामले पर बोलने से बच रहा है। एलडीएम श्याम पासवान और बिसौली पीएनबी प्रबंधन सुशांक इस बारे में कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं।
एक्सईएन नहीं पकड़ते मामले तो नहीं होता खुलासा
विद्युत वितरण खंड तृतीय बिसौली में बतौर एक्सईएन विनय कुमार ने जून 2018 में चार्ज संभाला इसके बाद लाखों का घपला उनकी नजर में आया। इसके बाद उन्होंने बैंक प्रबंधन को कई खत लिखे। यह भी कहा कि पावर कॉरपोरेशन के लाखों रुपये के चेकों का न तो भुगतान किया गया और न ही चेक वापस किए गए। ऐसे में उनको घपले का अंदेशा है। एक साल से ज्यादा दिनों तक वह बैंक के साथ लिखा-पढ़ी करते रहे। शायद बैंक प्रबंधन इस दौरान अपने अधिकारियों को बचाने का तानाबुना बुनता रहा। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में खुलासा हुआ तो बदायूं से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया। एक्सईएन विनय कुमार का कहना है कि यह पूरी तरह से बैंक की गलती है। ऐसे कैसे किसी और के चेकों का निजी खातों में भुगतान किया जाता रहा।