बदायूं। लोगों और राहगीरों की सुविधा के लिए जिले में प्रत्येक 10 किलोमीटर पर सार्वजनिक शौचालय बनाने का काम शुरू किया गया था। तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार ने इस संबंध में विशेष रुचि दिखाई थी। जिसके बाद इस दिशा में तेजी से काम चला, लेकिन डीएम का तबादला होने के बाद में यह काम फिर ठप होने लगा है। वजह यह है कि इसको बनाने के लिए जो एस्टीमेट बनाया गया था, उसकी एक प्रतिशत धनराशि भी अब तक प्रधानों के हाथों में नहीं आई है। ऐसे में जिन फर्मों से सामान खरीदा जा रहा था, उन्हें एक भी रुपये का पेमेंट नहीं हो सका है। जिसकी वजह से फर्मों ने सामान देने से इनकार करना शुरू कर दिया है। ऐसे में काम अधर में अटकने लगा है।
प्रदेश के सभी जिलों में शासन के निर्देश पर मुख्य मार्गों पर प्रत्येक 10 किलोमीटर की दूरी के अंतर से एक-एक सार्वजनिक शौचालय बनाए जाने थे। इसको लेकर तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने जिले में 41 प्वाइंट को चिह्नित करते हुए वहां पर सार्वजनिक शौचालय बनने केे निर्देश दिए थे। उसके बाद में इन शौचालयों को बनाने के लिए एस्टीमेट तैयार किया गया, जिसमें एक शौचालय पर करीब चार लाख रुपये का खर्च आ रहा था। डीएम का निर्देश मिलने के बाद सार्वजनिक शौचालयों को बनाने का काम शुरू किया गया। प्रधानों ने फर्मों से उधार में सामान लेकर काम करना प्रारंभ कर दिया। कहीं पर सवा, डेढ़ तो कहीं पर दो लाख रुपये तक खर्च कर इनका निर्माण कराया गया, लेेकिन इतनी धनराशि इन शौचालयों पर खर्च होने के बाद भी प्रधानों को अब तक एक भी रुपया नहीं मिला। जिस वजह से उनकी ओर से फर्मों का पेमेंट नहीं किया गया। ऐसे में फर्मों ने उन्हें सामान देने से मना कर दिया। इसकी वजह से इनका निर्माण बीच में रुक गया है।
शौचालय के साथ बनना थे पार्क जिले में जिन सार्वजनिक शौचालय के पास सरकारी जगह हैं, वहां पर पार्क का निर्माण भी कराया जाना था। साथ ही पार्कों में बैठने के लिए बेंच भी लगाई जानी थी। इसके अलावा मुख्य मार्गों पर शौचालय का बोर्ड लगाया जाना था, जिससे पता चल सके कि शौचालय कितनी दूूरी पर है। प्रत्येक शौचालय पर सोलर आरओ भी लगना था, लेकिन बजट के अभाव में सारा काम बीच में ही रुक गया।
सार्वजनिक शौचालय बनाने का काम अभी रुका हुआ चल रहा है। कुछ तकनीकी कमियां हैं। डोंगल की भी दिक्कत रही थी। इसको लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। जल्द ही समस्या का समाधान हो जाएगा। इसके बाद में काम शुरू होगा।
-बीपी सिंह, म्याऊं, बीडीओ
14 वें वित्त आयोग की धनराशि से प्रधानों को काम करना है। उन्हीं के पास में पैसा है। उनको ही डोंगल लगाकर पेमेंट करना है। ऐसे में काम कहीं का रुकना नहीं चाहिए। अगर फिर भी कोई समस्या आ रही है, तो वे बताएं, उसका समाधान कराया जाएगा।
-डॉ. शरनजीत कौर, डीपीआरओ