बदायूं। खरीफ के सीजन में किसानों को फसलों में लगाने के लिए समय से पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल सकी थी, जिसके चलते किसानों ने आए दिन जहां-तहां पर जाम लगाकर प्रशासन और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी। तब तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने इफको (आंवला) जाकर अधिकारियों से वार्ता कर जिले को खाद दिलायी, उसके कुछ समय बाद किसानों को इफको के सेंटरों से पर्याप्त मात्रा में खाद मिलना शुरू हो सकी थी। चूंकि इफको का समितियों पर साढ़े तीन करोड़ 35 लाख रुपये बकाया आ रहा था, जिस वजह से इफको ने इन केंद्रों को खाद देने से मना कर दिया था। अब अगर अधिकारियों ने पिछली बार से सबक नहीं लिया, तो इस बार रबी के सीजन में किसानों को फिर से मुसीबत खड़ी हो सकती है।
सरकार की ओर से किसानों की आय को दोगुना करने का प्रयास अधिकांशत: कागजों में ही चल रहा है, वहीं घरातल पर इसका असर कम ही देखने को मिल रहा है। इसकी वजह से खरीफ के सीजन में जिले के किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। हालत ये थी कि जब किसानों को खरीफ की फसल के लिए सबसे ज्यादा खाद की जरूरत थी, तब जिले की सभी 132 साधन सहकारी समितियों पर खाद का एक भी दाना मौजूद नहीं थी। ऐसे में किसान खाद पाने के लिए दर-दर भटकने पर मजबूर हो गया था। वहीं मौके का फायदा उठाते हुए प्राइवेट दुकानदारों ने 375 रुपये में बिकने वाला यूरिया खाद का कट्टा चार सौ रुपये से लेकर साढ़े चार सौ रुपये तक ब्लैक में बेचा था। फसल की जरूरत को देखते हुए किसानों ने मजबूरी में उन प्राइवेट दुकानों से महंगे दामों में खाद खरीदी। वहीं किसानों ने जिला प्रशासन की नाकामी को देखते हुए सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जिसके बाद तत्कालीन डीएम दिनेश कुुमार सिंह ने अधिकारियों से समस्या के बारे में पता किया। तो पता चला कि इफको का समितियों पर साढ़े तीन करोड़ रुपये बकाया आ रहा है। जिस कारण इफको ने किसी भी साधन सहकारी समिति पर खाद नहीं दी है। डीएम ने किसानों की समस्याओं पर ध्यान में रखते हुए इफको(आंवला) जाकर अधिकारियों से वार्ता की, जिसके बाद में जिले को खाद मुहैया हो सकी। हालांकि ये खाद इफको के छह सेंटरों पर ही उपलब्ध रही। वहीं अब तक इफको को केवल 15 लाख का ही पेमेंट किया गया है। ऐसे में रबी के सीजन में फिर से खाद की किल्लत होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
इफको का 15 लाख रुपये का पेमेंट कर दिया गया है, साथ ही तीन करोड़ 35 लाख रुपये जो बकाया रह गया है, उसके लिए उच्च स्तरीय अधिकारियों की वार्ता चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही उसका भी निस्तारण हो जाएगा। वहां से जो निर्देश मिलेेंगे, उसके अनुुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-राघवेंद्र, एआर कोऑपरेटिव