ब्लॉक जगत के गांव हसनपुर निवासी साधुराम पेशे से किसान हैं। वह तीन भाई हैं। बंटवारे के समय सभी के हिस्से में पुश्तैनी कच्चे मकान का अलग-अलग हिस्सा मिला था। उनके हिस्से में जो मकान मिला वह उसमें रह रहे थे। उन्होंने आठ माह पूर्व प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन उन्हें आज तक योजना का लाभ नहीं मिल सका है। बार-बार अधिकारियों से मिले, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब तक नहीं मिला। पिछले साल हुई बारिश में उनके कच्चे मकान की छत गिर गई थी, जिसके बाद में उनके पास सिर छिपाने तक की जगह तक नहीं बची है। ऐसे में उन्हें छोटे भाई के मकान में शरण लेनी पड़ी है।
केस दो
वजीरगंज के गांव कसेर निवासी धर्मवीर सिंह किसान हैं। उनके पास में रहने के लिए सिर्फ एक कच्चा मकान है। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। उनका कहना है कि पिछले साल उनका नाम सूची में भी शामिल हो गया था, जिसके बाद में योजना के लाभ मिलने की आस जगी, लेकिन बाद में उनका नाम किसी ने सूची से कटवा दिया। इसके बाद में कई बार अधिकारियों, कर्मचारियों से मिले, लेकिन उनकी समस्या की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब वह भी शांत होकर बैठ गए हैं और कच्चे मकान में रहना ही खुद का नसीब मान लिया है।
कच्चे मकान में रहने को मजबूर हैं लोग, विभाग कह रहा-सबको मुहैया हो चुके आवास
बदायूं। ये मामले तो सिर्फ बानगी भर हैं। जिले में काफी ऐसे लोग है, जो आज भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। कई लोग तो शांत होकर कच्चे मकानों को अपना नसीब मानकर रहने लगे हैं। खास बात ये है कि एक तरफ जहां आवास पाने को काफी संख्या में लोग भटक रहे हैं वहीं दूसरी ओर डीआरडीए को तलाशने पर भी प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या विभागीय अधिकारी घर बैठे-बैठे ही लाभार्थियों की तलाश कर रहे हैं या फिर वह कुछ आर्थिक लाभ की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जिसके न मिलने पर वे लाभार्थियों को अनदेखा किए हुए है।
शासन के निर्देश पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) की ओर से प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को 2016 से संचालित किया जा रहा हैं। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले पात्र लोगों को आवास का लाभ दिया जाना था, जिसका नाम सूची में हो, साथ ही उनके पास में पक्का मकान, आयकर करदाता या चार पहिया वाहन न हो। शासन के निर्देश पर विभाग ने ऐसे लोगों का चयन कर लिस्ट तैयार की, जिसके बाद में इन लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जाने लगा। वर्ष 2016-17 में 6519 लोगों को योजना का लाभ दिया गया। 2017-18 में 4598 व 2017-18 में 4896 आवास का लाभ लाभार्थियों को दिया गया। उसके बाद में इस साल शासन की ओर से 2851 प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य दिया गया।
विभाग की ओर से सर्वे कराया गया तो पाया गया कि जिले में करीब 1272 लोग ही ऐसे बचे हैं, जिन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। इनमें से अधिकतर को प्रथम किस्त भी जारी की जा चुकी है। वहीं विभाग द्वारा 1579 आवासों का लक्ष्य शासन को समर्पित कर दिया गया है, जबकि ये सत्र खत्म होने में अभी पांच माह का समय शेष बचा है। ऐसे में अगर प्रशासन के पास कोई लाभार्थी अब आता है, तो उनके पास सिवाय न कहने के कुछ भी नहीं बचा है।
शासन से 2851 प्रधानमंत्री आवास योजना का लक्ष्य मिला था। सर्वे कराया गया हैं इसमें 1272 लोग ही पात्र मिल सके हैं, जिन्हें योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसमें 1227 को योजना के तहत प्रथम किस्त दी जा चुुकी है। अब शासन से जैसे निर्देेश मिलेंगे, उसके अनुसार आगे इस दिशा में काम किया जाएगा।
-अनिल कुमार, पीडी, डीआरडीए