बदायूं। जिले में गोवंशीय पशुओं की दुर्दशा रुकने का नाम नहीं ले रही है। यह हाल तब है जब कुछ दिन पहले ही जिले की एक गोशाला में लापरवाही से 22 गोवंशीय पशुओं की मौत हो जाने के साथ कई पशुओं के गोशाला से गायब हो जाने के मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा गोवंशीय पशुओं की हिफाजत में लापरवाही पर हालही में महाराजगंज के डीएम और एसडीएम के साथ पांच अफसरों पर निलंबन की गाज गिरने और बरेली की कान्हा पशुशाला में बीते 15 दिन में 30 गोवंशीय पशुओं की मौत के बाद मेयर उमेश गौतम नगर निगम के अफसरों पर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने पर भी यहां सबक नहीं लिया गया है। अब यहां गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के लिए दी जाने वाली धनराशि कई माह से प्रधानों के खातों में नहीं पहुंची है। जिसकी वजह से प्रधान पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने में असमर्थता जाहिर करने लगे है। यही हाल रहा तो पशुओं के भूखों मरने की नौबत आ गई है। वजह यह है कि उनके भरण-पोषण को दी जाने वाली धनराशि कई माह से खातों में न पहुंचने के कारण प्रधानों ने भी हाथ खड़े करने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यहां के हालात महराजगंज से भी बदतर हो सकते हैं।
इधर विभागीय अधिकारी प्रधानों के भरण-पोषण का पुराना रिकॉर्ड पूरा न होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं। वजह चाहे कुछ भी हो, लेकिन यदि यही हाल रहा तो पशुओं के लिए दिक्कत हो सकती है।
सड़क पर छुट्टा घूमने वाले गोवंश की वजह से लोगों का जीना मुहाल हो गया था। कई जगहों पर तो गोवंशीय पशुओं के हमले में कुछ लोगों की मौत भी हुई। गोवंश किसानों की फसलों को भी लगातार नुकसान पहुंचा रहे थे। इसकी तमाम शिकायतें शासन-प्रशासन तक पहुंचीं। जिसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से छुट्टा गोवंश के लिए स्थायी व अस्थायी गोशाला बनाए जाने के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने अस्थायी गोशालाओं को खोलने के लिए संबंधित अधिकारियों को लगाया।
इस समय सवा तीन सौ के करीब अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। जिनमें करीब छह हजार गोवंश पाले जा रहे हैं। शासन की ओर से गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण के लिए प्रति पशु 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से धनराशि मुहैया करने के विभाग को निर्देश दिए गए हैं, जिसके लिए बाकायदा बजट भी जारी किया गया है। विभाग की ओर से अस्थायी गोशालाओं के लिए शुरू में तो भरण पोषण के लिए धनराशि भेजी गई, पर कुछ समय बाद धनराशि मुहैया कराना बंद कर दिया गया। कुछ प्रधानों का कहना है कि ऐसे में गोवंश के चारे की व्यवस्था करने में परेशानी आने लगी है। अगर जल्द ही धनराशि नहीं आई तो वे चारे की व्यवस्था नहीं कर पाएंगे, वहीं विभाग का कहना है कि प्रधानों द्वारा पूर्व में भरण पोषण के लिए ली गई धनराशि का रिकॉर्ड बीडीओ स्तर पर नहीं दिया गया। जिस वजह से बीडीओ ने जिला स्तर पर डिमांड नहीं भेजी है।
क्या बोले प्रधान
धनराशि रिलीज न होने से चारे की हो रही दिक्कत
गोवंशीय पशुओं के भरण पोषण में परेशानी आ रही है, क्योंकि काफी समय से उनके भरण पोषण को मिलने वाली धनराशि नहीं मिल सकी है। पुराने सभी अभिलेख पूरे करके ब्लॉक पर जमा भी कर दिए हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
-मनोज शर्मा, चौड़ेरा
गोवंशीय पशुओं को भूखा रख नहीं सकते हैं। त्योहार है घर-परिवार में अन्य काम भी हैं। वहां पर भी धनराशि की जरूरत पड़ती है। ऐसे में मजबूरी सामने आ गई है कि घर की जरूरतों पर धनराशि खर्च करें या फिर गोवंशीय पशुओं के रख रखाव पर।
- अनिल द्विवेदी, ककोड़ा
विभाग को चाहिए कि वह धनराशि को माहवार देना शुरू कर दें, ताकि किसी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े, लेकिन विभाग की ओर से अब तक इस तरह की कोई पैरवी नहीं की गई है। ऐसे में समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है।
-पंकज मिश्रा, लभारी
गोशाला में पाले जा रहे गोवंशीय पशुओं के लिए प्रदेश सरकार की ओर से धनराशि मुहैया कराई जा रही है, लेकिन जिला स्तर से प्रधानों को ये धनराशि नियमित रूप से नहीं मिल पा रही है। ऐसे में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
-चिरौंजी लाल, कचौरा
कई प्रधानों द्वारा पुरानी धनराशि के बारे में कोई हिसाब नहीं दिया जा रहा है। जिसकी वजह से बीडीओ स्तर से अगली ग्रांट की मांग नहीं की जा रही है। जो प्रधान पिछला हिसाब दिखा रहे हैं, उसके बाद धनराशि जारी की जा रही है।
-डॉ. एके जादौन, सीवीओ