प्राथमिक विद्यालय बनिया में पट्टी पर बैठे बच्चे। संवाद
बदायूं। नए सत्र शुरू हो गया है, लेकिन नौनिहालों को बैठने के लिए बेंच नहीं मिल सकी है। इसकी वजह से वह जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विभाग की ओर से इसके लिए बजट भी दिया जा रहा है।
परिषदीय विद्यालय के नौनिहाल को स्कूलों में बेहतर सुविधाएं देने के लिए कवायद शुरु की गई थी। कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों की सूरत बदली जा रही है। इसी के तहत नौनिहाल को बैठने के लिए बेंच खरीदने का प्रावधान भी किया गया था, लेकिन जिले के कई विद्यालयों में बेंच नहीं है। प्राथमिक विद्यालय म्याऊं में बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ते हैं। प्रधानाध्यापक ब्रह्मऋषि मिश्रा ने बताया हमें मेज कुर्सी के लिए सरकार की ओर से कोई बजट नहीं दिया गया। ओरछी क्षेत्र के गांव खेड़ा दास, सिसरका, बझेड़ा नूतन आदि गांवों में संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच कुर्सी नहीं है। आसफपुर ब्लॉक के गांव परमानंदपुर में 200 से अधिक छात्र पंजीकृत हैं। एक कमरे में दो-दो कक्षाएं संचालित हो रही हैं। छात्रों को कुर्सी मेज नहीं है, इसकी वजह से जमीन पर बैठना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापक सीमा अलमी ने बताया कि वह अपने स्कूल के कमरों, खेल के मैदान, फर्नीचर, स्थाई सफाई कर्मी आदि समस्याओं को लेकर अधिकारियों को लिखित में बता चुकी हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। ऐसे ही वजीरगंज के प्राथमिक विद्यालय बनिया में बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक सरिता रानी ने बताया कि कुर्सी मेज के लिए रुपये नहीं आते। सिर्फ टाट पट्टी के लिए रुपये आते हैं।
कोट
- प्राथमिक स्कूलों के लिए बेंच आदि की व्यवस्था के लिए कोई बजट नहीं आया है। जूनियर स्कूलों में बच्चे कुर्सी बेंच पर बैठकर ही पढ़ाई कर रहे हैं। अगर कहीं नहीं है तो उसकी जांच कराएंगे।
- वीरेंद्र कुमार सिंह, बीएसए
प्राथमिक विद्यालय बनिया में पट्टी पर बैठे बच्चे। संवाद