उझानी। दंत चिकित्सक के चाइल्ड केयर लीव पर चले जाने के बाद उनके कक्ष पर पड़ा ताला बृहस्पतिवार सुबह अंतत: खोल दिया गया। कमरे में मशीनों और कुर्सियों पर जमी धूल की परतों को साफ करने के लिए पूरे दिन काम भी चला। इसी के साथ जल्द ही दंत चिकित्सक की वैकल्पिक व्यवस्था कराए जाने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
सीएचसी में दंत चिकित्सक के लिए आवंटित कमरा नंबर 30 के करीब पांच महीना से बंद रहने से लौट रहे मरीजों की समस्या को 18 अप्रैल को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के संज्ञान में पूरा मामला पहुंचा तो व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी गई। दंत चिकित्सक करीब पांच महीना पहले मातृत्व अवकाश पर चली गई थीं। इसके बाद वह ड्यूटी पर लौटीं जरूर, लेकिन छह- सात दिन बाद ही चाइल्ड केयर लीव लेकर चली गईं। यही नहीं, डेंटल टेक्नीशियन भी नहीं आया। इसलिए डेंटल चिकित्सक का कमरा बंद ही रहा।
बृहस्पतिवार पूर्वाह्न कमरा नंबर- 30 खोला गया तो कर्मचारियों को मशीन और कुर्सियों पर जमी धूल साफ करने में ही पूरा दिन लग गया। दंत रोगियों के इलाज को मिली मशीन पूरी तरह ठीक है या नहीं, यह सफाई हो जाने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसे लेकर चिकित्साधीक्षक डा. राजकुमार गंगवार ने बताया कि दंत रोगियों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के लिए उन्होंने सीएमओ को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत दंत चिकित्सक की तैनाती को चिट्ठी भेजी है। दंत चिकित्सक के आने तक सहायक के जरिये ही जरूरी कामकाज कराया जाएगा।
अमर उजाला में प्रकाशित खबर।