गौरामई गांव की चौपाल में चर्चा करते ग्रामीण। संवाद
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कादरचौक। विधानसभा चुनावों के लिए शुक्रवार से नामांकन शुरू हो गए। बड़ी आबादी वाले गांवों की चौपालों पर इन दिनों चुनाव को लेकर ही चर्चा हो रही है। कोई कहता है कि विकास नहीं हुआ तो कोई विकास का दावा करता है। शुक्रवार को दिन में मौसम साफ रहा, धूप खिली तो लोग चौपालों में जुटे और चुनाव को लेकर चर्चाएं होती रहीं।
शेखूपुर विधानसभा का गौरामई गांव बड़ी आबादी का है। यहां से रमजानपुर, बेहटा, बादुल्लागंज और कटिन्ना बरचऊ को भी रोड जाती हैं। यह गांव भी बड़ी आबादी के हैं और चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। गौरामई से इन गांवों को जाने वाली कोई सड़क ठीक नहीं है। चौपाल पर टूटी सड़कों और छुट्टा पशुओं की समस्या को लेकर कई बार लोग मुखर भी होते हैं, कोई कहता है कि विकास हुआ तो कोई विकास न होने की टीस बयां करता है।
गांव के मोहम्मद उमर का कहना है कि इस बार वोट मांगने आने वालों से गिला-शिकवा करेंगे। आमिर खां का कहना है कि इन पांच साल सालों में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ। जयवीर सिंह का कहना है कि भाजपा सरकार में राशन प्रणाली अच्छी है। इससे पहले राशन के नाम पर डाका डाला जाता था। गांव के पप्पू ने बिजली न मिलने की बात कहने के साथ छुट्टा पशुओं की समस्या को बयां किया।
रमजानपुर के बुजुर्ग अख्तर खान ने भी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि पहले नेता दल में नहीं दिल में होते थे। निर्दलीय चुनाव लड़ कर मौलवी फकरे आलम ने कांग्रेस के प्रत्याशी को ही हरा दिया था।
चर्चा के दौरान उसहैत और शेखूपुर विधानसभा को लेकर भी कई बार लोगों के लहजों में तल्खी दिखी। बुजुर्ग अख्तर यहीं नहीं रुके चौपाल पर लोगों को सलाह भी दे दी कि जाति धर्म से उठकर बात की जाए तो विकास होगा। संवाद