मां के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना के साथ शुक्रवार को भक्तों ने नवरात्र का परायण किया। यज्ञ-हवन के साथ कन्याओं को भोज कराकर लोगों ने सुख-समृद्धि की कामना की। आखिरी दिन भी खूब भीड़ रही। सुबह से ही भक्तों की कतारें लग गईं। कुछ लोगों ने घरों में ही कन्या भोज कराया तो तमाम लोगों ने मंदिर पहुंचकर यह पुण्य कमाया। देहात क्षेत्रों में भी देवी मंदिरों में मेले जैसा माहौल रहा।
मंदिरों और घरों में भोर से ही आस्था का माहौल बनने लगा। देवी को प्रसन्न करने के लिए लोगों ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। कन्या-बरुआ भोज के साथ ही उनको उपहार भी भेंट किए गए। कन्या पूजा का यह बड़ा धार्मिक आयोजन है। जगह-जगह चना और हलवा के प्रसाद का वितरण भी किया गया।
घरों में घट, देवी प्रतिमाएं और चित्र स्थापित कर पूरे नवरात्र पूजा-अर्चना करने के बाद नवमी को विसर्जन किया गया। विधि-विधान से पंडितों से पूजा अर्चना कराई और यज्ञ के बाद पूर्णाहुति दी।
रोगों से बचाता है यह माहौल
नवरात्र में अधिक से अधिक फलों का सेवन, उपवास और हवन-पूजन रोगों से बचने के लिए भी हैं। इस संबंध में पंडित गिरीश का मानना है कि हिंदू धर्म गुरुओं ने ऐसी अवधारणा से व्रत और त्योहार बनाए हैं जो स्वास्थ्य विज्ञान की कसौटी पर खरे उतरते हैं।