उझानी अस्पताल में बच्चों को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने पहुंचा दंपती। संवाद
उझानी (बदायूं)। कुत्ते के काटने से करीब दो माह बाद भैंस के मर जाने से पशुपालक का पूरा परिवार दहशत में है। उन्होंने रैबीज फैलने का अंदेशा जताते हुए चिकित्सकों को पूरे घटना क्रम से अवगत कराया है। इसके बाद महिलाओं समेत परिवार के सातों सदस्यों को एंटीरैबीज के इंजेक्शन लगवा दिए गए हैं।
मामला कस्बे के मोहल्ला गौतमपुरी का है। मोहल्ले के जयवेश शर्मा की भैंस को करीब दो महीने पहले कुत्ते ने काट लिया था। डेढ़ महीने बाद ही भैंस की हालत बिगड़ने लगी तो पशुपालक समेत उनके परिजनों ने भैंस का देसी उपचार भी कराया।
जयवेश ने बताया कि तीन दिन पहले भैंस मर गई। मरने से तीन-चार दिन पहले तक जयवेश समेत उनके परिवार के सभी सदस्यों ने उसी भैंस का दूध पीया था। परिवार के लोगों को जब पता चला कि रैबीज फैलने से भैंस मरी है तो वह दहशत में आ गए। इसके बाद जयवेश ने दो दिन पहले अपने भाई अवधेश, पिता दिनेश चंद्र और मां पुष्पा देवी को एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाया, फिर शनिवार दोपहर खुद के अलावा पत्नी पूजा, मासूम बच्चों में कशिश और गोलू के इंजेक्शन लगवाए।
हालांकि स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, पर वह नहीं मानें। चिकित्साधिकारी डॉ. हरीश कुमार ने बताया कि दूध से इंसान के शरीर में रैबीज पनपने की आशंका नहीं है। दूध खौलाने के बाद ही पिलाया जाता है। खौल जाने के बाद रैबीज स्वत: नष्ट हो जाता है। हालांकि कच्चा दूध पीने से नुकसान संभव है।