हर साल पालिका नालों की सफाई के दावे करती है। हर साल सफाई के नाम पर मोटा बजट भी खर्च किया जाता है। लेकिन रविवार को हुई हल्की बारिश ने ही मानसून के लिए प्रशासन की तैयारियों के दावों की पोल खोल दी। इस दौरान शहर में जगह-जगह जलभराव हो गया। इस बीच पहली बार लोगों ने बारिश के पानी में कार को बहते देखा।
तमाम दावों और वायदों के बीच हर साल जनता जलभराव की परेशानी झेलती है। इस बार भी यही हाल होना है। पालिका ने नालों की सफाई के नाम पर अभी तक केवल खानापूर्ति ही की है। छोटे-छोटे मोहल्लों के मकानों के आगे की नालियों पर बनी पटिया तुड़वाकर नालों पर किया गया अतिक्रमण छोड़ा जा रहा है। 45 लाख की मशीन नाला सफाई के लिए खरीदी गई, लेकिन उसका भी कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है।
यही वजह रही कि रविवार को डेढ़ से पौने दो घंटे की बारिश में सड़कों पर ढाई से तीन फुट पानी भर गया। जलभराव का आलम ये था कि शहर में सुभाष चौक के पास एक कार तक बहने लगी। शहर में ऐसा पहली बार हुआ है कि लोगों ने कार को बहते हुए देखा।