चिराग तले अंधेरा.. यह कहावत जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय पर सटीक बैठ रही है। बेसिक स्कूलों को सुधारने में जुटे बीएसए अपने कार्यालय में फैली अव्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। हैरानी की बात है कि दिव्यांग बच्चों को वितरित होनेे आईं पुस्तकें सर्दी में कर्मचारियों के लिए अलाव का काम कर रही हैं। बाकी बची पुस्तकों की गड्डियां स्टोर में धूल में अटी हैं।
हर जिले में दिव्यांग बच्चों के लिए अलग से स्कूल होते हैं, जहां पर विशेष शिक्षकों द्वारा उन्हें शिक्षा दी जाती है। दिव्यांग बच्चों की पुस्तकें भी अलग तरह की होती हैं। हाथ से छूकर दिव्यांग बच्चे शब्दों को पहचानते हैं। शासन से हर साल यह पुस्तकें आती हैं। शैक्षिक सत्र 2014-15 में भी यह पुस्तकें दिव्यांग बच्चों को वितरित होने के लिए आईं थीं। कई स्थानों पर वितरित कर दीं गईं, तो बहुत सी पुस्तकों के बंडल बीएसए ऑफिस में दूसरी मंजिल के एक कक्ष में धूल में अटी हैं। इन पुस्तकों को निकालकर कर्मचारी बेझिझक अलाव में जला रहे हैं।
यदि ऐसा हुआ है या हो रहा है, तो इसकी जांच होगी। यह कृत्य क्षमा करने लायक नहीं है। यदि दिव्यांग बच्चों की पुस्तकों को जलाकर हाथ तापा जा रहा है, तो इस मामले में कड़ी कार्रवाई होगी। - आनंद प्रकाश शर्मा, बीएसए