गंगा के लहरा घाट पर नाव पलटने से तीन महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई। पांच लोगों को किसी तरह सुरक्षित निकाल लिया गया। पांच अब भी लापता हैं। इनकी तलाश में एक दर्जन गोताखोरों को लगाया गया है। बरेली से फ्लड पीएसी की टीम भी बुलाई गई है। डीएम शंभूनाथ और एसएसपी सौमित्र यादव ने गांव पहुंच कर घटना की जानकारी ली, लेकिन दोनों अधिकारियों ने घटनास्थल पर जाना मुनासिब नहीं समझा।
घटना शनिवार सुबह लगभग नौ बजे की है। सहसवान तहसील के गांव नगलाबरन की महिलाएं और उनके बच्चे नाव में सवार होकर गंगा के उस पार गेहूं काटने जा रहे थे। गांव का ही बिट्टू नाव चला रहा था। जैसे ही नाव गंगा की बीच धार में पहुुंची, तेज हवा से नाव डगमगाने लगी। नाव छोटी थी और सवारियां ज्यादा, इसलिए वह पलट गई। महिलाओं और बच्चों ने चीख-पुकार मचाई।
घाट के इस ओर नाव लौटने का इंतजार कर रहे गांव के ही सत्यपाल और मोरपाल ने ये माजरा देखा तो वह उन्हें बचाने के लिए गंगा में कूद पड़े। इन दोनों ने आठ महिलाओं और दो बच्चों को बाहर निकाल लिया। इनमें कमलेश (30) पत्नी पप्पू, पप्पू की दो वर्षीय पुत्री अंकिता, नेकसी (50) पत्नी सौदान सिंह, चंद्रवती (35) पत्नी लायक सिंह की मौत हो चुकी थी। राजकुमारी (12) पुत्री अमरपाल, गोमती (35) पत्नी नेकसे, चंद्रवती (25) पत्नी पीतांबर, लक्ष्मी (10) पुत्री अमरपाल और भागवती (60) पत्नी हरनरायण सुरक्षित थीं।
खबर मिलने पर डीएम शंभूनाथ, एसएसपी सौमित्र यादव, एसडीएम हरीशंकर यादव, तहसीलदार नानकचंद भी गांव पहुंच गए। कछला से एक दर्जन गोताखोरों को लापता महिलाओं और बच्चों की खोज में लगाया गया है। देर शाम तक पवित्रता (15) पत्नी देवरूप, खुशबू (15) पुत्री देवरूप, तारावती (40) पत्नी रामखिलाड़ी, संतोषी (15) पुत्री रामखिलाड़ी, शांति देवी (65) पत्नी सरदार का पता नहीं लगा है। तलाशने के लिए नरौरा बैराज से गंगा में पानी रुकवा दिया गया है। कछला गंगा घाट पर जाल लगवा दिए गए हैं। देर शाम तक लापता लोगों की तलाश जारी थी। क्षेत्रीय विधायक ओंकार सिंह ने मृतकों परविारीजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच-पांच लाख रुपये दिलाए जाने की घोषणा की है।