उझानी (बदायूं)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई टीम का हिस्सा बने राज्यसभा सांसद बीएल वर्मा 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद से पिछड़ों में खासकर लोधी समाज के एक बड़े नेता के रूप में उभरते चले गए। प्रदेश सरकार ने उन्हें यूपी सिडको का उपाध्यक्ष बनाया। इसके बाद भी उन्होंने संगठन के काम पर ज्यादा जोर दिया। उनकी इस निष्ठा का परिणाम रहा कि उन्हें राज्य सभा में मौका दिया गया और अब मंत्री पद से नवाजे गए।
ब्लॉक क्षेत्र के गांव ज्योरा पारवाला में जन्मे बीएल वर्मा की राजनीतिक कर्मभूमि उझानी रही है। राजनीतिक सफर शुरू करते समय ही पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के सबसे नजदीक कहे जाने वाले वर्मा ने खुद कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। संगठन के लिए काम करते हुए वह ऊंचाइयों की ओर बढ़े तो कई बार विषम परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ा। पिछले विधानसभा चुनाव में बृज क्षेत्र अध्यक्ष के रूप में उनकी जो भूमिका रही, वह काफी सफल बताई गई है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहते हुए उन्हें यूपी सिडको के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली। उनकी संगठनात्मक क्षमता का नतीजा है कि विधानसभा में लोधी जाति के करीब 60 विधायक हैं, जिनमें वर्मा की खास अहमियत है।
राजनीतिक के जानकारों की मानें तो कल्याण सिंह के राजस्थान के राज्यपाल रहते पार्टी को उनकी जाति में एक ऐसे नेता के कमी महसूस होने लगी हुई जो लोधों को भाजपा में एकजुट रख पाए। इसके लिए भी उन्हें बार-बार आगे किया जाता रहा। दरअसल, बरेली, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, पीलीभीत, एटा, महोबा, कन्नौज, हमीरपुर आदि कई ऐसे जिले हैं, जहां लोधों के मतदाताओं की संख्या कोई खास कम नहीं है। रूहेलखंड में लोधों के नेता के रूप में आंवला के विधायक धर्मपाल सिंह (तत्कालीन सिंचाई मंत्री) एक चेहरा रहे लेकिन प्रदेश सरकार और पार्टी ने धर्मपाल सिंह से किनारा किया तो वर्मा ही उनका विकल्प बनकर उभरे। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे एटा के सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भइया’ की बजाय बीएल वर्मा को वरीयता भी उनकी संगठनात्मक क्षमता में शामिल बताई जा रही है। वैसे राजू भइया के बेटे संदीप सिंह योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री हैं।
टूंडला उपचुनाव में निभाई थी पार्टी प्रत्याशी की जीत में अहम भूमिका
उझानी। केंद्र सरकार में राज्यमंत्री बने बीएल वर्मा हालांकि आगरा जिले के प्रभारी हैं लेकिन उन्होंने टूंडला विधानसभा सीट पर करीब दो साल पहले हुए उपचुनाव में अहम भूमिका निभाई। एसपी सिंह बघेल के इस्तीफा के बाद पार्टी ने वर्मा को प्रत्याशी की जीत दिलाने के लिए जिम्मेदारी सौंपी थी। उपचुनाव के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी उनकी कार्यकुशलता की तारीफ की थी। उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी की जीत के बाद उनकी चमक बढ़ती चली गई।
राजनीतिक प्रोफाइल
जन्म- सात अगस्त-1961, गांव ज्योरा पारवाला
उझानी (बदायूं ) को भारतीय जीवन बीमा निगम के जरिए बनाया कर्मभूमि।
- 1980 में भाजपा सदस्य के रूप में राजनीतिक जीवन की शुरूआत, कल्याण सिंह से नजदीकी शुरू।
- 1984 में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री, फिर प्रदेश मंत्री।
- 1990 में भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष, बाद में प्रदेश स्तर पर पहुंचे।
- 1999 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ भाजपा छोड़ी।
- 2009 में कल्याण सिंह की राष्ट्रीय क्रांति पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष बने।
- 2013 में कल्याण सिंह के साथ भाजपा में घर वापसी हुई।
- 2016 में भाजपा के बृज क्षेत्र के अध्यक्ष फिर प्रदेश उपाध्यक्ष बने।
- 2018 में यूपी सिडको के अध्यक्ष (दर्जा राज्यमंत्री) का पदभार।
- 2020 में भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में भेजा।