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अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली पार्टी ने %बलवे का आरोपी% बना दिया पदाधिकारी

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बदायूं। अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाली भारतीय जनता पार्टी ने अपने मंडल स्तर के चुनाव में अपने सभी नियमों को ताक पर रखते हुए बलवे के एक आरोपी को पदाधिकारी बना दिया। जबकि चुनावों के वक्त पार्टी के पदाधिकारी व बड़े नेता यह दावा करते रहे हैं कि उनकी पार्टी में कोई ऐसा व्यक्ति पदाधिकारी नहीं बन सकता, जिसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज हो, ठेकेदार हो और उसकी छवि साफ सुथरी न हो। नवनियुक्त पदाधिकारी के खिलाफ न सिर्फ एफआईआर दर्ज है बल्कि उसके खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। केवल इतना ही नहीं, उसकी पत्नी के नाम पर शराब की दुकानें भी संचालित हैं। पार्टी के इस कदम से अन्य पदाधिकारियों में भी अंदर ही अंदर रोष पनप रहा है, हालांकि वे खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।
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हाल ही में भाजपा ने अपने 30 मंडलों के चुनाव कराए हैं, जिनमें प्रत्येक का एक मंडल या नगर अध्यक्ष चुना गया है। हालांकि पार्टी ने इनका चुनाव करते समय इनकी साफ सुथरी छवि को लेकर काफी बातें कहीं थी, लेकिन इनमें एक पदाधिकारी ऐसा भी पार्टी ने चुन लिया जिस पर बलवे की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। मामला लगभग सात साल पुराना है। वर्ष 2012 में सपा सरकार थी। उस समय डाक विभाग के एक कर्मचारी ने सवा तीन करोड़ का गबन किया था, जिस पर सीबीआई की आर्थिक अन्वेक्षण टीम ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा था, साथ ही रिकवरी के लिए उसकी संपत्ति कुर्क कर ली गई थी। उझानी रोड छुईया मंदिर के पास स्थित उसकी साबुन बनाने की फैक्टरी उसकी पत्नी के नाम थी। जिला प्रशासन इस फैक्टरी को कब्जे में लेकर नीलामी की तैयारी में था। कई बार बोली लग चुकी थी लेकिन नीलामी नहीं हुई। एक दिसंबर 2012 को कुछ लोगों ने उसका गुपचुप तरीके से बैनामा करा लिया और फिर उसमें तोड़फोड़ कर दी। रोकने पर पुलिस टीम पर हमला भी कर दिया था। इस मामले में पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ धारा 147, 148, 447, 427, 332, 34 आईपीसी और 7 क्रमिनल लॉ एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की थी। सभी आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल है। इनमें एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी आरोपियों के खिलाफ मामला विचाराधीन है।
अब भाजपा में जो पदाधिकारी बनाया गया है, वह इसी मामले में एक आरोपी है। इसके अलावा शहर समेत कासगंज जनपद में उसकी शराब की दुकानें भी हैं। हालांकि ये दुकानें उसकी पत्नी के नाम पर हैं, लेकिन सारा कारोबार यह पदाधिकारी ही देख रहा है। अब ऐसे में पार्टी द्वारा एक आरोपी को अहम पद दे देना किसी के गले नहीं उतर रहा है। पार्टी से लंबे समय से जुड़ एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी के कई वरिष्ठों को इस बात का पता है लेकिन कोई कुछ कहने को तैयार नहीं है। इससे पार्टी के कुछ लोगों में रोष भी है।
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यह मामला मेरे समय का नहीं है। इसकी मुझे जानकारी भी नहीं है। यदि ऐसा है तो इसे दिखवाया जाएगा कि इसमें पुलिस की क्या भूमिका रही, तभी कुछ कहा जा सकता है।
जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी सिटी
पार्टी में जो जिम्मेदार पदों पर हैं, उन्हें ठेकेदार या कोटेदार नहीं होना चाहिए। इसके अलावा उनकी छवि साफ हो तथा उन पर आपराधिक मुकदमे नहीं होने चाहिए। जिलाध्यक्ष के चुनाव से पूर्व भी पार्टी ने इस बारे में साफ कह दिया था। यदि चुनाव के वक्त ऐसी गलती हुई है या कोई ऐसा व्यक्ति पदाधिकारी बन गया है तो पार्टी को उस पर ध्यान देना चाहिए।
डॉ. सुभाष शर्मा, जिला चुनाव अधिकारी, भाजपा
मंडल या जिले का चुनाव जिला चुनाव अधिकारी या सह चुनाव अधिकारी की देखरेख में हुआ है। इसमें हम लोगों की कोई भूमिका नहीं है। सभी चुनावों में बाहर से चुनाव अधिकारी आए थे। इसके अलावा किसी पदाधिकारी पर मुकदमे की जानकारी नहीं है। -सुधीर श्रीवास्तव, जिला महामंत्री भाजपा
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