बदायूं। वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की नौ टीमों ने शुक्रवार को जिले में 18 स्थानों से 151 पक्षियों के सैंपल लेकर जांच के लिए आईवीआरआई भेजे हैं। सबसे ज्यादा 52 सैंपल सदर तहसील में लिए गए हैं। हालांकि, अब तक जिले में बर्ड फ्लू का कोई पॉजिटिव केस नहीं मिला है। इसके बाद भी पूरी अहतियात बरती जा रही है। पोल्ट्री उत्पादकों और मांस विक्रेताओं को जरूरी दिशा निर्देश दिए गए हैं।
पड़ोसी जिले पीलीभीत में बर्ड फ्लू का मामला मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर हड़कंप है। पोल्ट्री उत्पादों के दूसरे जिलों से आने पर पहले ही रोक लगा दी गई है। बृहस्पतिवार को 326 पक्षियों के सैंपल जांच को भेजे गए थे। शुक्रवार को पशुपालन विभाग की पांच और वन विभाग की चार टीमों ने जिले में अभियान चलाकर जिले में 18 स्थानों से 151 पक्षियों के सैंपल लिए। इनमें क्लोएकल 66, ओरोफैरिंजीयल 66, और सात सीरम सैंपल लिए गए। वन विभाग की टीमों ने कछला गंगाघाट और सागर ताल से पक्षियों के सैंपल लिए गए। इनमें 12 सैंपल जंगली पक्षियों के भी हैं। दातागंज की टीम ने 40, सदर की टीम ने 52, सहसवान की टीम ने 10, बिसौली की टीम ने 25 और बिल्सी की टीम ने 24 सैंपल लिए। सभी सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई भेजे गए हैं।
डीएम कुमार प्रशांत ने पशुपालन विभाग और वन विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। पोल्ट्री उत्पादों के साथ मांस विक्रेताओं के लिए भी जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों की रिपोर्ट सीधे डीएम को भेजी जा रही है।
जंगली पक्षियों के सैंपल लेने में छूट रहे पसीने
पशु पालन विभाग और वन विभाग की टीमों को जंगली पक्षियों के सैंपल लेने में मशक्कत का सामना कर पड़ रहा है। मुर्गियों या पशुओं के सैंपल तो आसानी से हो जाते हैं। आईवीआरआई ने साफ कर दिया है कि जांच के लिए जीवित पक्षियों के सैंपल ही स्वीकार किए जाएंगे। जीवित जंगली पक्षियों को पकड़ना आसान नहीं है। ऐसे में टीमों ने विशेषज्ञों से बात करने के बाद बीच का रास्ता निकालते हुए पक्षियों की बीट का सैंपल लेना शुरू किया है। दरअसल, पकड़ने से पहले जंगली पक्षी उड़ जाते हैं। अब इनकी बीट का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी पक्षी में बर्ड फ्लू का वायरस है तो उसकी बीट में भी वायरस होगा।
अंडा और मांस खाने से पहले बरतें सावधानी
- बर्ड फ्लू के खतरे के बीच पशु पालन विभाग ने साफ कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति अंडा या मांस का सेवन करते वक्त सावधानी से काम लें। अंडा और मीट अच्छी तरह से पकाने के बाद ही खाएं। दरअसल, कच्चे अंडा या अधपके मीट में वायरस का खतरा रहता है। इसे पकाने के बाद बर्ड फ्लू समेत अन्य वायरस भी नष्ट हो जाते हैं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके जादौन ने बताया कि पोल्ट्री फार्मों को भी बर्ड फ्लू को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
अब तक जिले में बर्ड फ्लू का कोई मामला सामने नहीं आया है। पशु चिकित्सा विभाग की पांच और वन विभाग की चार टीमें पूरे जिले में अभियान चलाकर सैंपलिंग कर रही हैं। लोगों को भी अंडा या मांस के सेवन को लेकर सावधानियों के बारे में बताया जा रहा है। जंगली पक्षियों के सैंपल में कठिनाई जा रही है। अब इनकी बीट का सैंपल लिया जा रहा है।
- डॉ. एके जादौन, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी