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पहले कुदरत ने सताया, अब सूद ढाएगा सितम

Tue, 02 Jun 2015 07:39 PM IST
badaun
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कहावत है ‘आसमान से गिरे खजूर में अटके’ मौजूदा समय किसानों की हालत ऐसी ही है। पहले तो उनको दैवीय आपदा ने मारा और अब उनको बैंक से लिए गए लोन की अदायगी में तीन गुने ब्याज की वसूली देने की चिंता खाए जा रही है। कहने को कागजों में इस साल काश्तकारों से वसूली स्थगित कर दी गई है, लेकिन अंदर की तस्वीर दूसरी ही है। जो किसान तय समय में चार प्रतिशत ब्याज देकर ऋण से मुक्ति पा जाते थे, अब उनको तीन गुना ज्यादा ब्याज देना होगा। बैंक के कायदे-कानून इसकी गवाही दे रहे हैं। कई किसान डिफाल्टर घोषित हो चुके हैं। बैंकों में उनकी आरसी कटी रखी हैं, बस इंतजार है समय सीमा खत्म होने का।
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पिछले मार्च-अप्रैल के महीने किसानों पर भारी बीते। बरसात, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने गेहूं समेत अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। कुदरत की मार से हताश-निराश और कर्ज में डूबे किसान को जब कुछ नहीं सूझा तो उसने आत्मघाती कदम उठाने शुरू कर दिए। बरेली मंडल में सैकड़ों अन्नदाताओं ने अपनी इहलीला समाप्त कर ली थी। हर परिस्थितियों से जूझने का माद्दा रखने वालों का भी धैर्य जवाब दे गया था। अकेले बदायूं जिले से ही 13 किसानों ने खुदकुशी कर ली थी। 21 सदमे में चल बसे थे। केंद्र और प्रदेश सरकार ने उचित मुआवजे का भरोसा दिलाया। मुआवजा बंटा भी तो ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर। इसमें लेखपालों पर गलत सर्वे करने और सुविधा शुल्क वसूलने की तोहमत भी लगीं। किसानों की ओर से मांगें उठीं, तो सरकार ने किसानों से कृषि लोन की वसूली पर रोक लगाकर फौरी तौर पर राहत देने का ऐलान किया।
सरकार ने तो वसूली रोकने की घोषणा कर वाहवाही लूट ली, लेकिन नियम-कानून के बंधन में बंधे बैंक प्रबंधन ने चार प्रतिशत के स्थान पर 12 प्रतिशत ब्याज दर तय कर दी। अब जब वसूली शुरू होगी, तो किसानों से चार के बजाय 12 प्रतिशत का ब्याज पड़ेगा। किसानों को जब से ये पता चला है तो उनकी नींद उड़ी हुई है। वह इसे राहत कम मुसीबत ज्यादा मान रहे हैं। कारण ये है कि उनकी वसूली तो स्थगित हो गई, लेकिन उन पर ब्याज का मीटर घूमता ही रहेगा। पहले तो तय सीमा में वह चार प्रतिशत ब्याज देकर ही निपट जाते। अब उन पर पेनाल्टी मिलाकर करीब 13 प्रतिशत ब्याज की दर से भुगतान करना होगा।
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तिगुनी ब्याज दर वसूली हुई तो स्थिति होगी भयावह
गांव कंडेला के प्रगतिशील किसान रवेंद्र सिंह इसके भुक्तभोगी हैं। उन्होंने केसीसी पर 3.86 लाख का लोन लिया था। बैंक ने उन्हें डिफाल्टर घोषित करते हुए उन पर चार से 12 प्रतिशत का ब्याज ठोक दिया। नोटिस, पेनाल्टी का एक प्रतिशत अलग से देना होगा। उनका कहना है कि ये तो किसान के साथ छलावा है। ब्याज की दर तिगुनी हो जाने से किसान लोन अदा नहीं कर पाएगा। वह डिफाल्टर घोषित होगा। बैंक आरसी जारी करेगी, तो आपदा से भी भयावह स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। इसी गांव के गुरवीर सिंह, यादवीर सिंह, वीरेंद्र सिंह, रहमुद्दीन, राजपाल केसीसी से लोन लेने के बाद अब 12 प्रतिशत देय के दायरे में आ गए हैं। सब लोन अदायगी को लेकर चिंतित हैं।

बैंक के ये हैं नियम
किसान क्रेडिट कार्ड यानि केसीसी पर बैंक सात प्रतिशत सालाना ब्याज लेता है। खाता अगर सही संचालित होता है, तो बैंक उसे वर्ष के अंत में तीन प्रतिशत ब्याज लौटा देता है। यानि किसान को साल में चार प्रतिशत ही ब्याज देना पड़ता है।

वसूली तो स्थगित, ब्याज का मीटर घूमता रहेगा
वर्ष 2014-15 वित्तीय वर्ष के अंतर्गत लोन लेने वाले किसानों से वसूली एक साल के लिए स्थगित कर दी गई है, लेकिन ब्याज चलता रहेगा। ब्याज की दर स्थगित हुई है, न ही अन्य देय। अब जो ऋण वसूली होगी, वह 12 प्रतिशत सालाना ब्याज की दर से। जिन किसानों ने वर्ष 2013-14 में लोन लिया है, उनसे सख्ती नहीं की जाएगी, लेकिन ब्याज की दर यही रहेगी।

फैक्ट फाइल
वर्ष 2014-15 में राष्ट्रीयकृत बैंकों से 1,40, 963 किसानों बांटा गया है 1,587 करोड़ का ऋण

इस वर्ष इतने किसानों की गई जान
-12 ने फांसी लगाई
-एक ने जहर खाया
-21 सदमे में मरे, इनमें दो महिला किसान भी थीं

इस वित्तीय वर्ष तक वसूली पर रोक लगी है। एग्रीकल्चर लोन की रिकवरी भी निल है। अभी किसी को नोटिस नहीं भेजा जा रहा है। एग्रीकल्चर लोन के मामले में बैंकों ने दो क्राइटेरिया अपनाए हैं। जिन बैंकों ने बाउचर डाल कर डेट बढ़ा दी है, वहां सात प्रतिशत का ब्याज लिया जाएगा और जहां बाउचर रिन्यूवल के लिए अलग से रखे गए हैं, वहां 12 प्रतिशत ब्याज देय होगा।
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-चारू भट्टाचार्य, अग्रणी बैंक प्रबंधक
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