आखिरकार बदायूं में हुए बीज घोटाले की जांच शुरू हो गई है। यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (पीसीएफ) के एमडी आरपी गोस्वामी के निर्देश पर उप महाप्रबंधक नरेंद्र सिंह घोटाले की जांच के लिए यहां पहुंच गए हैं। घोटाले के मामले को अमर उजाला ने जोर-शोर से उठाया था। इसका संज्ञान लेते हुए पीसीएफ ने अब ये कदम उठाया है। उप महाप्रबंधक ने अमर उजाला ने छह और आठ फरवरी को प्रकाशित खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इन खबरों के आधार पर ही जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
पीसीएफ ने किसानों को सब्सिडी पर देने के लिए जिन कोऑपरेटिव संस्थाओं को बीज भेजा है, उसमें से दो संस्थाओं ने बीज न पहुंचने की बात कही है। इस संबंध में प्रपत्रों की फिलहाल जांच हो गई है। बीज कहां गया ? जांच में यह पेच उलझ सकता है।
अक्तूबर-नवंबर, 2014 में रामपुर, पीलीभीत और उत्तराखंड के रामनगर और जसपुर से 13,750 क्विंटल गेहूं का बीज आया था। मध्यस्थ संस्था पीसीएफ द्वारा इस बीज को सहकारी संस्थाओं को भिजवाया गया। इनमें पैक्स समितियां, क्रय-विक्रय, डीसीएफ, केंद्रीय उपभोक्ता, पीसीएफ सेवा केंद्र और इफको केंद्र शामिल हैं। सर्वाधिक बीज डीसीएफ को दिया गया था। बाद में संबंधित कई संस्थाओं के बीज न पहुंचने की बात कहने पर घोटाला सामने आया था।