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चाबी मैन बन बैठे नलकूप मालिक

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जिले में सिंचाई का प्रमुख साधन नलकूप ही हैं। इसके लिए सरकार ने भी बड़ी तादाद में नलकूप स्थापित किए हैं। स्थिति है कि जिले में 1201 सरकारी नलकूप हैं। इन नलकूपों को संचालन जिस प्रकार से आपरेटर के द्वारा होना चाहिए नहीं हो रहा है। अधिकतर नलकूपों का संचालन चाबी मैन दबंग कर रहे हैं। विवाद से बचने के लिए आपरेटर गांव के दबंगों को चाबी सौंप देते हैं और खुद घर बैठे तनखाह लेते रहते हैं। हालत यह है कि दबंग अब किसानों से मनमानी आवपासी भी वसूल करने लगे हैं जो सरकारी योजना से किसानों को लाभ पहुंचाने की मंशा पर बड़ा धक्का है। 
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प्रदेश सरकार ने जिले में सरकारी नलकूपों से सिंचाई के लिए आवपासी मुफ्त कर रखी है। जिले में नलकूप संचालन की बिगड़ी व्यवस्था और दबंगों की दखलंदाजी ने पूरा खेल ही बिगाड़ रखा है। हालत यह है कि चाबी मैन ही सरकारी नलकूपों के मालिक बन बैठे हैं। दबंगों को चाबियां नलकूप चालकों ने ही दबंगों को सौंप रखी है। दरअसल, सिंचाई के समय अपनी बारी के लिए किसानों के विवादों से बचने के लिए अपनी जान बचाने को आपरेटर ही दबंगों को चाबियां सौंप देते हैं। अबतक तो दबंग अपने मर्जी से लोगों को पानी देते थे। अब इन लोगों ने हद कर दी है। ये लोग आवपासी भी वसूलने लगे हैं। जबकि सरकार ने आवपासी माफ कर रखी है। यह सरकार की मंशा को इससे बड़ा धक्का लगा है। 
बताते हैं कि पूर्व में सरकारी नलकूपों से 20 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सिंचाई की आवपासी वसूल की जाती थी। अब जब सरकारी नलकूपों से सिंचाई मुफ्त है तो दबंग चाबी मैन 50 रुपये प्रति बीघा तक के हिसाब से किसानों से आवपासी भी वसूल कर रहे हैं। 
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अन्य संसाधनों से मंहगी पड़ती है सिंचाई
यहां बता दें कि किसान अन्य किसी संसाधन से सिंचाई करता है तो उसे 80 से 100 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से खर्चा आता है। इसलिए वह अपना काम निकालने के लिए और फसल सूखने सेे बचाने के लिए शिकायत भी नहीं करता और दबंग चाबी मैन की कठपुतली बना हुआ है। 
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कम बिजली भी अराजकता का बड़ा कारण
नलकूपों का संचालन बिना बिजली के नहीं हो सकता। यह अलग बात है कि निकट भविष्य में सौर ऊर्जा से भी नलकूप चलेंगे। सरकारी नलकूपों का संचालन सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए हरी झंडंी मिल गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति नहीं मिलती तो पूरे समय नलकूप ही नहीं चल पाते। ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली का हाल यह है कि चार से पांच घंटा ही बिजली मिल पा रही है। कम समय में कितने लोगों की सिंचाई हो। इसलिए दबंगों ने सिंचाई के लिए आवपासी भी वसूलनी शुरू कर दी है। 
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इस प्रकार की शिकायतें मिल रहीं हैं। लेकिन गांव में जाने पर किसानों की ऐसी लामबंदी हो जाती है कि अवैध काम की कोई पुष्टि नहीं करता है। एक-दूसरे का स्वार्थ टकराता है। आपरेटरों की कमी और बिजली की सप्लाई कम मिलना भी अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं। हम लोग इस बड़ी समस्या के निदान के लिए प्रयासरत हैं। 
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-गिरीश चंद्र, एक्सईएन नलकूप प्रथम खंड
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