बुधवार को अधिकांश निजी अस्पताल बंद रहे। वहीं, कुछ अस्पतालों में डॉक्टरों ने मरीजों का ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया है। इससे एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने बाहर होने का बहाना बनाते हुए ऑपरेशन से इंकार कर दिया। निजी प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों ने पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेने से साफ इंकार कर दिया। मेडिकल स्टोर्स पर पांच सौ रुपये और हजार रुपये के नोट देने पर सभी रुपयों की दवाइयां देने की बात कही गई, लेकिन रुपये वापस नहीं किए गए। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बसों में बड़े नोट न लेने यात्रियों से झगड़े की नौबत आ गई। पेट्रोल पंप सीधा पांच सौ और हजार रुपये का डीजल-पेट्रोल बेचा गया। शहर का सराफा बाजार खुला, लेकिन कुछ भी बेचने से साफ मना कर दिया गया। खानपान से लेकर अन्य जरूरी वस्तुओं की बिक्री में भी भारी गिरावट देखी गई।
बंद नोटों के चलते मरीजों को काफी परेशानी हुई। शहर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में डॉक्टर ने बाहर होने की बात कहते हुए पथरी के दो और बच्चेदानी का एक ऑपरेशन सौ-सौ रुपये के नोट लाने पर करने की कहकर टाल दिया। वहां पर मौजूद कर्मचारी ने कहा कि डॉक्टर साहब बाहर गए हैं, जबकि कई मरीज परेशान होकर लौटते रहे। एक बाल रोग विशेषज्ञ के यहां मरीज तो देखे गए, लेकिन बड़े नोट लेने से मना कर दिया गया। इस बाबत म्याऊं के रिशु वर्मा ने कहा कि वह बाद में कहीं से इंतजाम करके सौ रुपये के नोट लाए, तब बच्चे का इलाज कराया। इस बाबत डॉ. विवेक जौहरी ने कहा कि केवल सरकारी अस्पतालों में लेने का आदेश है, निजी अस्पतालों में नहीं। क्लीनिकों पर भी हजार और पांच सौ के नोट लेने से इंकार किया गया।
रेलवे स्टेशन पर शुरू में आने वाले चंद यात्रियों को छोड़कर पांच और एक हजार रुपये देने वाले यात्रियों को साफ मना कर दिया। इससे बुकिंग क्लर्क की यात्रियों से दिन भर नोकझोंक होती रही। परिवहन विभाग की स्थिति तो और भी खराब रही। बस कंडक्टरों की तमाम यात्रियों से मारपीट होने की नौबत आ पहुंची। बस कंडक्टरों ने हजार और पांच सौ रुपये के नोट लेने से इंकार कर दिया। इकॉनिमिक सर्जिकल स्ट्राइक का असर जिले भर के बाजार पर पड़ा।
रजिस्ट्री, बैंक, बाजार में पसरा रहा सन्नाटा, कामकाज ठप
बदायूं। रजिस्ट्री कार्यालय में सन्नाटा रहा। महज चंद कर्मचारी दफ्तर में बैठे इंतजार करते रहे कि कोई तो आएगा जो रजिस्ट्री कराएगा, लेकिन दिन भर कोई व्यक्ति रजिस्ट्री कराने के नाम पर नहीं पहुंचा। बैंक शाखाओं और डाकघरों में भी केवल कर्मचारी मौजूद रहे, जबकि गेट पर बैंक बंदी का ताला लटका दिया गया। बावजूद इसके तमाम लोग रुपये के बारे में जानकारी करने के लिए पहुंचते रहे, कि उन लोगों के रुपये आखिर कैसे जमा हो सकेंगे।
शहर में सब्जी मंडी, बर्तन बाजार, सराफा बाजार, रेडीमेड एवं बाजारों में तो एकदम से सन्नाटा पसरा रहा। ग्राहकों ने दुकानों पर चढ़ने की जरूरत भी नहीं समझी। इससे तमाम दुकानदारों की जहां हजारों लाखों रुपये की बिक्री होती थी। उन दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, इन दुकानों पर केवल लोग यह पूछने के लिए चढ़े कि पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट लेंगे। सब्जी मंडी में दुकानदार सब्जियों को सजाए बैठे रहे, लेकिन वहां पर अधिकांश लोगों ने कोई खरीदारी नहीं की है।
शहर का सराफा बाजार खुला, लेकिन उन लोगों ने कुछ भी बेचने से इंकार कर दिया। ऐसा इसलिए भी हुआ कि क्योंकि सराफा बाजार के रेट की घोषणा ही नहीं की गई। इससे बाजार में कोई बिक्री नहीं हो सकी। उधर, बर्तन एवं अन्य बाजारों की स्थिति भी डांवाडोल रही।