हवाला करोबारियों को लेकर एलर्ट के बीच खुफिया इकाइयों के निशाने पर बदायूं भी आ गया है। जिला पहले से ही फर्जी आईडी से खोले गए बैंक खातों से करोड़ों रुपये के लेनदेन के लिए बदनाम रहा है। 500 और 1000 रुपये के नोटों पर पाबंदी लगाए जाने के बाद बैंकों और खुफिया इकाइयों के सामने फर्जी बैंक खातों से लेनदेन पर नजर रखना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। बिसौली और सहसवान में हवाला कारोबारियों के बड़े नेटवर्क का पहले ही पर्दाफाश हो चुका है। कई मामलों में तो सीबीआई जांच कर रही है।
बिसौली तहसील के कई गांव हवाला कारोबार के लिए बदनाम हैं। संग्रामपुर का शादाब और पपगांव का हशमत फर्जी बैंक खातों से लेनदेन के मामले में जेल में हैं। इनको साइवर क्राइम सेल ने मार्च 2015 में गिरफ्तार किया था। इन दोनों के 20 बैंक खातों से करोड़ों रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया था। इतना ही नहीं सितंबर 2014 में बिजनौर के जाटान मोहल्ले में हुए बम ब्लास्ट के तार भी बिसौली के गांवों से जुड़े पाए गए थे। इसको लेकर आतंकवाद निरोधक दस्ता ने यहां छापामारी भी की थी। जुलाई 2016 में सहसवान में फर्जी बैंक खातों से 2.50 करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला पकड़ में आया। तीन लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भी भेजा था। आरोपी इशहाक, अब्दुल कादिर, फरीद आलम बिसौली के गांवों से ताल्लुक रखते हैं।
हवाला कारोबार को लेकर सूबे में जारी एलर्ट के बाद खुफिया इकाइयों ने निगरानी तेज कर ली है। गौर करने वाली बात यह है कि फर्जी बैंक खातों से करोड़ों रुपये के लेनदेन के मामले में जांच अब भी ठंडे बस्ते में है। इन मामलों में पुलिस और खुफिया इकाइयां तह तक पहुंच ही नहीं सकीं। सवाल यह है कि आखिर फर्जी बैंक खातों में करोड़ों रुपये कहां से आए और इनको कहां खंपाया गया? एजेंसियों के सामने इसका खुलासा किसी चुनौती से कम नहीं है।
रातों-रात अमीर बन गए थे तमाम लोग
दबतोरी/बदायूं। बिसौली क्षेत्र के लक्ष्मीपुर, संग्रामपुर, पपगांव, दबतोरा, दबतोरी समेत करीब आधा दर्जन ऐसे गांव हैं जहां लोग हवाला कारोबार से जुडने के बाद रातों-रात अमीर गए गए। इसको लेकर इलाके में पहले तो महीनों चर्चाएं चलती रहीं। वर्ष 2012 में जब सीबीआई को हवाला कारोबारियों के तार इन गांवों से जुड़े होने का पता लगा तो इन गांवों में छापामारी भी की गईं। कई लोगों के घरों पर नोटिस भी चस्पा किए गए थे। मामले में अब भी पड़ताल चल रही है।