बाजार रहा गुलजार, दोपहर में बढ़ी अचानक भीड़ से रंगत बिखरी
पतित पावनी गंगा तट पर लगे मेला ककोड़ा में जहां कल्पवासी व श्रद्धालुओं की घरों की ओर वापसी होना शुरू हो गई। वहीं मेले में खरीदारी करने पहुंचे आसपास गांव के ग्रामीणों ने दोपहर बाद मेले में रौनक लौटा दी। बैलगाड़ियों, ट्रैक्टर, बाइक से गंगा स्नान करने के लिए पहुंचे। उन्होंने बेटी-बेटियों, बच्चों के लिए समान भी खरीदा। दुर्गम क्षेत्रों के ग्रामीण बक्से, अलमारियां, ढोलकें और अन्य घरेलू समान खरीदने में लगे रहे। जबकि महिलाओं ने मीना बाजार में जमकर खरीदारी की। खजला, जलेबी और पेठा की खूब बिक्री हुई। मायूस बैठे व्यापारियों का ग्रामीणों ने आंसू पोंछने का काम किया है।
मेले में गंगा किनारे लगा मुख्य द्वार हट गया। सांस्कृतिक कलामंच, प्रदर्शनी व अन्य धार्मिक संस्थाओं के कैंप कार्यालय भी मेले से जा चुके हैं। तंबुओं, नलों को उखाड़ने का क्रम जारी है। अभी मेले में रुके श्रद्धालुओं की ओर से गंगा किनारे खिचड़ी का आनंद लिया जा रहा है। वहीं कल्पवासी भी वापस लौटने लगे। सुबह तक मेला स्थल खाली-खाली नजर आ रहा था। पंक्तिबद्ध श्रद्धालु वापस लौट रहे थे। लेकिन जैसे ही सूरज चढ़ा, वैसे ही कासगंज व बदायूं क्षेत्र के निकटतम रहने वाले ग्रामीणों का रेला उमडना शुरू हो गए। सुबह से बंद पड़े झूले भी चलना शुरू हो गए। एकाएक बढ़ी भीड़ ने व्यापारियों के चेहरों पर खुशी ला दी। दुकानदारों ने भी भाव में गिरावट कर लोगों को जमकर सामान बेचा।