गुरुवार को हुई बरसात गेहूं की फसल के लिए मुफीद है। इस बारिश
ने जहां एक और सिंचाई का फायदा कर दिया, वहीं कल्ले फूटने के दौर में गेहूं
की फसल को ‘नेचुरल टॉनिक’ मिल गया है।
करीब डेढ़-पौने दो महीना की उम्र
में गेहूं की फसल के लिए शुरुआती से ही मौसम ने साथ दिया है। पिछले महीना
बरसात हुई तो उस वक्त पहली सिंचाई ही बच गई थी। फसल चूंकि इस वक्त कल्ले
फूटने के दौर से गुजर रही है, सो दूसरी बरसात ने उसे संजीवनी दे दी है।
हल्की बरसात की वजह से पाला पड़ने की आशंका कम रहती है, सो कल्ले भी बढ़वार
के साथ पौधों के रूप में बढ़ने लगेंगे। गेहूं की फसल में कल्ले की पैदावार
बढ़ाने में सहायक बनते हैं। बरसात के बाद से खुश गेहूं उत्पादकों की मानें
की मानें तो ईश्वर इसी तरह से मेहरबान रहा तो पैदावार बंपर होगी। सब्जी
फसलों में शिमला मिर्च, फूल और पत्ता गोभी, सेम के साथ गाजर और शलजम को भी
फायदा हुआ है।
आलू में जलभराव बनेगा घातक
उझानी। कृषि
वैज्ञानिकों की मानें तो आलू की फसल पकने की स्थिति में है। ऐसे में बरसात
की वजह से फसल वाले खेत में पानी भर गया तो आलू के जमीन के अंदर ही सड़ने
की आशंका है। इसलिए जरूरी है कि किसान आलू के खेत में पानी के निकास की
व्यवस्था समय रहते कर लें तो आलू को सड़ने से बचाया जा सकता है।
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इस
वक्त की बरसात से वैसे तो हर फसल को फायदा है, लेकिन आलू को लेकर दिक्कत
है कि खेत में पानी नहीं भरने दें। इस बार मौसम ने अन्नदाता का पूरा साथ
दिया है। काश्तकार समय रहते उर्वरक का भी इस्तेमाल करें।
- डॉ. संजय कुमार, कृषि वैज्ञानिक
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बिल्सी।
कई दिनों से पड़ रही सर्दी बारिश का साथ पाकर और अधिक मारक हो गई है।
बुधवार देर रात शुरू हुई बरसात गुरुवार को पूरे दिन होती रही। ठंड के साथ
अब गलन भी बढ़ गई है। बरसात से जन जीवन अस्त-व्यस्त रहा। बाजारों में
सन्नाटा रहा।